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स्वस्थिति

विठोबा पाहुणा आला आमुचे घरा । निंबलोण करा जीवेंभावें ॥१॥

पंचप्राणज्योति ओंवाळुनी आरती । ओवाळिला पती रखुमाईचा ॥२॥

शड्‌रस पक्‍कवान्नें विस्तारिलें ताट । जेवूं एकवट चोखा म्हणे ॥३॥

संत चोखामेळा - अभंग संग्रह २

संत चोखामेळा
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लावणीक ११६ वी फुढिल भाग