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स्वस्थिति

जनक तूं माझा जननी जगाची । करुणा आमुची कां हो नये ॥१॥

कासया संसार लावियेला पाठीं । पडलीसे तुटी तुमची माझी ॥२॥

जन्म जरा मरण आम्हां सुख दुःख । पहासी कौतुक काय देवा ॥३॥

गहिंवरुनी चोखा उभा महाद्वारीं । विनवी जोडूनि करीं विठोबासी ॥४॥

संत चोखामेळा - अभंग संग्रह २

संत चोखामेळा
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लावणीक ११६ वी फुढिल भाग