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स्वस्थिति

इतकेंचि देईं रामनाम मुखीं । संताची संगती सेवा सार ॥१॥

निरंतर घोष जयाचे मंदिरीं । तयाचिये घरीं सुख मज ॥२॥

उच्छिष्‍ट धणिवरी पोटभरी धाये । दुजी नको सोय देवराया ॥३॥

चोखा म्हणे माझी पुरवावी आळी । माय तूं माउली कृपाळू देवा ॥४॥

संत चोखामेळा - अभंग संग्रह २

संत चोखामेळा
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लावणीक ११६ वी फुढिल भाग