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स्वस्थिति

सुखाचिया लागीं करितों उपाव । तों अवघेंचि वाव दिसों येतें ॥१॥

करितां तळमळ मन हें राहिना । अनावर जाणा वासना हे ॥२॥

अवघेंचि साकडें दिसोनियां आलें । न बोलवें तें भलें कोणा पुढें ॥३॥

चोखा म्हणे मी पडिलों गुर्‍हाडीं । सोडवी तातडी यांतूनियां ॥४॥

संत चोखामेळा - अभंग संग्रह २

संत चोखामेळा
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लावणीक ११६ वी फुढिल भाग