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अनमोल वचन - रबीन्द्रनाथ टैगोर

  • प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।
     
  • तथ्य कई हैं, लेकिन सच एक ही है।
  • प्रत्येक शिशु यह संदेश लेकर आता है कि ईश्वर अभी मनुष्यों से निराश नहीं हुआ है।

  • विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है।
     
  • फूल एकत्रित करने के लिए ठहर मत जाओ। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे।
     
  • चंद्रमा अपना प्रकाश संपूर्ण आकाश में फैलाता है परंतु अपना कलंक अपने ही पास रखता है।
     
  • कलाकार प्रकृति का प्रेमी है अत: वह उसका दास भी है और स्वामी भी।
     
  • केवल खड़े रहकर पानी देखते रहने से आप सागर पार नहीं कर सकते।
     
  • हम यह प्रार्थना न करें कि हमारे ऊपर खतरे न आएं, बल्कि यह प्रार्थना करें कि हम उनका निडरता से सामना कर सकें।

 

कथासरित्सागर

संकलित
Chapters
वररुचि की कथा
गुणाढ्य की कथा
राजा विक्रम और दो ब्राह्मणों की कथा
शूरसेन और सुषेणा की कथा
कैवर्तककुमार की कथा
काबुलीवाला
अनमोल वचन - रबीन्द्रनाथ टैगोर
दिन अँधेरा-मेघ झरते - रबीन्द्रनाथ टैगोर
चल तू अकेला! - रबीन्द्रनाथ टैगोर
विपदाओं से रक्षा करो, यह न मेरी प्रार्थना - रबीन्द्रनाथ टैगोर
ओ मेरे देश की मिट्टी-रबीन्द्रनाथ टैगोर
राजा का महल-रबीन्द्रनाथ टैगोर
पूस की रात - मुंशी प्रेमचंद
मिट्ठू - मुंशी प्रेमचंद
दो बैलों की कथा - मुंशी प्रेमचंद
वैराग्य - मुंशी प्रेमचंद
यह भी नशा, वह भी नशा - मुंशी प्रेमचंद
राष्ट्र का सेवक - मुंशी प्रेमचंद
परीक्षा - मुंशी प्रेमचंद
कितनी जमीन? - लियो टोल्स्टोय