Android app on Google Play

 

देवी कवच - कर्मसमर्पणम्

 

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्र्वरि ॥
मन्त्रहीनं क्रियाहिनं भक्तिहीनं सुरेश्र्वरि ।
यत्कृतं तु मया कर्मं परिपूर्णं तदस्तु मे ॥
//इति प्रार्थना //
अनेन कृतकर्माणा भगवति श्रीमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वतीस्वरुपिणी श्रीजगद्म्बा प्रीयताम् ।
तत्सद्‌ब्र्ह्मार्पणमस्तु ॥ (असे म्हणून ताम्हण्यात एक पळी पाणी सोडावे व प्रथम सांगितल्याप्रमाणे आचमन करावे.)
 

देवी कवचे

संकलित
Chapters
श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम्‌
देवी कवच - ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्...
देवी कवच - अथार्गलास्तोत्रम्
देवी कवच - कीलकम्
देवी कवच - रात्रिसूक्तम्
देवी कवच - श्रीसप्तश्लोकी
देवी कवच - तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम्
देवी कवच - सिद्धकुज्जिकास्तोत्रम्
देवी कवच - दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला
देवी कवच - देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्
देवी कवच - कर्मसमर्पणम्
देवी कवच - श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
देवी कवच - अन्नपूर्णास्तोत्रम्
देवी कवच - ऋग्वेदोक्तं देवीसूक्तम्
देवी कवच - प्राधानिकं रहस्यम्
देवी कवच - वैकृतिकं रहस्यम्
देवी कवच - मूर्तिरहस्यम्
देवी कवच - क्षमा-प्रार्थना
श्रीभार्गवकवचम्‌