सिंहासन बत्तिसी (Hindi)


संकलित
सिंहासन बत्तीसी एक लोककथा संग्रह है। महाराजा विक्रमादित्य भारतीय लोककथाओं के एक बहुत ही चर्चित पात्र रहे हैं। उन्हें भारतीय इतिहास में प्रजावत्सल, जननायक, प्रयोगवादी एवं दूरदर्शी शासक होने का गौरव प्राप्त है। प्राचीनकाल से ही उनके गुणों पर प्रकाश डालने वाली कथाओं की बहुत ही समृद्ध परम्परा रही है। सिंहासन बत्तीसी 32 कथाओं का संग्रह है जिसमें 32 पुतलियाँ विक्रमादित्य के विभिन्न गुणों का कथा के रूप में वर्णन करती हैं।

Chapters

राजा भोज

पहली पुतली - रत्नमंजरी

दूसरी पुतली - चित्रलेखा

तीसरी पुतली - चन्द्रकला

चौथी पुतली - कामकंदला

पाँचवीं पुतली - लीलावती

छठी पुतली - रविभामा

सातवीं पुतली - कौमुदी

आठवीं पुतली - पुष्पवती

नवीं पुतली - मधुमालती

दसवीं पुतली - प्रभावती

ग्यारहवीं पुतली - त्रिलोचनी

बारहवी पुतली - पद्मावती

तेरहवीं पुतली - कीर्तिमती

चौदहवीं पुतली - सुनयना

पन्द्रहवीं पुतली - सुंदरवती

सोलहवीं पुतली - सत्यवती

सत्रहवीं पुतली - विद्यावती

अठारहवीं पुतली - तारामती

उन्नीसवी पुतली - रूपरेखा

बीसवीं पुतली - ज्ञानवती

इक्कीसवीं पुतली - चन्द्रज्योति

बाइसवीं पुतली - अनुरोधवती

तेइसवीं पुतली - धर्मवती

चौबीसवीं पुतली - करुणावती

पच्चीसवीं पुतली - त्रिनेत्री

छब्बीसवीं पुतली - मृगनयनी

सताइसवीं पुतली - मलयवती

अट्ठाइसवीं पुतली - वैदेही

उन्तीसवीं पुतली - मानवती

तीसवीं पुतली - जयलक्ष्मी

इकत्तीसवीं पुतली - कौशल्या

बत्तीसवीं पुतली - रानी रूपवती