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बच्चों को गर्दन तक ज़मीन में गाड़ना

उत्तर कर्णाटक की इस प्रथा में बच्चों को गर्दन तक धरती में गाड़ दिया जाता है ताकि उनकी शारीरिक विकलांगता ठीक हो सके | इस प्रथा को सूर्य ग्रहण के दौरान अंजाम दिया जाता है |सूर्योदय से पहले इतने गहरे गड्ढे खोदे जाते हैं की सिर्फ बच्चे की गर्दन बाहर रह सके | बच्चों को एक से लेकर छह  घंटो के लिए इन गड्ढों में रखा जाता है | कई माँ बाप का मानना है की बच्चों में विकलांगता सूर्य ग्रहण के नकरात्मक प्रभाव की वजह से होती है | 

इसलिए उनको ठीक करने के लिए ये ज़रूरी है की सूर्य ग्रहण के दौरान उन पर सूर्य की किरणें पड़ें | उन्हे धरती में इसलिए डाला जाता है क्यूंकि मिटटी को पावन मानते हैं | कई माँ बाप का दावा है की ऐसा करने के बाद उनका बच्चा ठीक हो गया है |