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पुनर्जन्म पर क्षोध

वर्जिनिया विश्विद्यालय के मनोवैज्ञानिक इआन स्टीवेंसन ने कई ऐसे छोटे बच्चों की जांच की जिन्हें अपनी पिछली ज़िन्दगी याद थी | उन्होनें ४० सालों के भीतर करीब २५०० ऐसे मामलों की जांच की और 12 किताबें छापीं जिनमें शामिल थीं ट्वेंटी केसेस सज्जेस्टिव ऑफ़ रीन्कार्नाशन  और वेयर रीन्कार्नाशन एंड बायोलॉजी इन्टेर्सेक्ट | स्टीवेंसन ने बड़े ही व्यवस्थित 
तरीके से हर बच्चे के कथन लिखे और फिर जिस मरे हुए व्यक्ति की बच्चे ने पहचान की उसको ढूँढा , और फिर बच्चे की याद से मरे हुए व्यक्ति के जीवन के तथ्यों का मिलाप करवाया | रीन्कार्नाशन और बायोलॉजी में उन्होनें जन्म के निशानों और दोषों को मृत व्यक्ति की चोटों से मिलाया , और शव परिक्षण की तस्वीरों जैसे मेडिकल रिकॉर्ड के माध्यम से इन तथ्यों की पुष्टि की |और लोग जिन्होनें रीन्कार्नाशन क्षोध में भाग लिया वह हैं जिम बी टकर ,अन्तोनिया मिल्स , सतवंत पसरीचा , गोडविन समररत्ने  और एरलेंदुर हराल्द्सन | पॉल एडवर्ड्स जैसे शंकालुओं ने इन सब मामलों का विश्लेषण किया और उन्हें हकीकत से परे माना , और साथ में ये भी कहा है की पुनर्जन्म के सबूत इन्सान के अपने डर और सोच से जन्मी झूठी यादों और चयनात्मक सोच का नतीजा है और इसलिए इसे पुख्ता सबूत नहीं माना जा सकता है | 


 कार्ल सगन ने अपनी किताब द डेमोन होंटएड वर्ल्ड में स्टीवन की जांच के नतीजों को ध्यान से एकत्र किया गया अनुभवी डेटा माना , हांलाकि उन्होंने पुनर्जन्म को इन कहानियों का आधार मानने से इनकार कर दिया | सैम हर्रिस ने अपनी किताब द एंड ऑफ़ फैथ में स्टीवेंसन के लेखों को मानसिक अनुभवों को समझने के लिए इस्तेमाल की गयी जानकारी में शामिल किया | 


इआन विल्सन ने दलील दी है की स्टीवेंसन के अधिकांश केस गरीब बच्चों के हैं जो अमीर या उच्च जाती के जीवन को याद करते हैं | उन्होनें दलील दी की ऐसे मामले पूर्व जन्म के परिवार वालों से पैसा एंठने के तरीके हो सकते हैं | रोबर्ट बेकर की क्षोध के मुताबिक स्टीवेंसन और अन्य मनोवैज्ञानिको द्वारा जांच किये गए पुनर्जन्म के अनुभवों को मनोवैज्ञानिक कारकों  से समझा जा सकता है | दार्शनिक पॉल एडवर्ड्स का कहना है की पुनर्जन्म अटकलों का खेल है और आधुनिक विज्ञान से मेल नहीं खाता है |
पुनर्जन्म के विरोध में दी गयी दलीलों में शामिल हैं तथ्य जो कहते हैं की अधिकांश लोगों को अपना पिछला जन्म याद नहीं रहता है और आधुनिक विज्ञान में ऐसा  कोई तरीका नहीं है जिससे एक व्यक्ति मौत से बच दुसरे शरीर में प्रवेश कर जाए | स्टीवेंसन जैसे क्षोध्कर्ताओं ने  इन सीमाओं को स्वीकार किया है |