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उत्तर प्रदेश के कोशी के पास कौकिला वन में सिद्ध शनि देव का मन्दिर

 

लोगों की हंसी करने की आदत है। रामायण के पुष्पक विमान की बात सुन कर लोग जो नही समझते थे, वे हंसी किया करते थे, जब तक स्वयं रामेश्वरम के दर्शन नही करें, तब तक पत्थर भी पानी में तैर सकते हैं, विश्वास ही नही होता, लेकिन जब रामकुन्ड के पास जाकर उस पत्थर के दर्शन किये और साक्षात रूप से पानी में तैरता हुआ पाया तो सिवाय नमस्कार करने के और कुछ समझ में नही आया। जब भगवान श्री कृष्ण का बंशी बजाता हुआ एक पैर से खडा हुआ रूप देखा तो समझ में आया कि विद्वानों ने शनि देव के बीज मंत्र में जो (शं) बीज का अच्छर चुना है, वह अगर रेखांकित रूप से सजा दिया जाये तो वह और कोई नही स्वयं शनिदेव के रूप मे भगवान श्री कृष्ण ही माने जायेंगे.यह सिद्ध पीठ कोसी से छ: किलोमीटर दूर और नन्द गांव से सटा हुआ कोकिला वन है, इस वन में द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण जो सोलह कला सम्पूर्ण ईश्वर हैं, ने शनि को कहावतों और पुराणों की कथाओं के अनुसार दर्शन दिया, और आशीर्वाद भी दिया कि यह वन उनका है, और जो इस वन की परिक्रमा करेगा, और शनिदेव की पूजा अर्चना करेगा, वह मेरी कृपा की तरह से ही शनिदेव की कृपा प्राप्त कर सकेगा.और जो भी जातक इस शनि सिद्ध पीठ के प्रति दर्शन, पूजा पाठ का अन्तर्मुखी होकर सद्भावना से विश्वास करेगा, वह भी शनि के किसी भी उपद्रव से ग्रस्त नही होगा.यहां पर शनिवार को मेला लगता है। जातक अपने अपने श्रद्धानुसार कोई दंडवत परिक्रमा करता है, या कोई पैदल परिक्रमा करता है, जो लोग शनि देव का राजा दशरथ कृत स्तोत्र का पाठ करते हुए, या शनि के बीज मंत्र का जाप करते हुये परिक्रमा करते हैं, उनको अच्छे फ़लों की शीघ्र प्राप्ति हो जाती है।

 

शनि देव 2

संकलित
Chapters
भारत में तीन चमत्कारिक शनि सिद्ध पीठ
महाराष्ट्र का शिंगणापुर गांव का सिद्ध पीठ
मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास शनिश्चरा मन्दिर
उत्तर प्रदेश के कोशी के पास कौकिला वन में सिद्ध शनि देव का मन्दिर
शनि की साढे साती
शनि परमकल्याण की तरफ़ भेजता है
काशी में शनिदेव ने तपस्या करने के बाद ग्रहत्व प्राप्त किया था
शनि मंत्र
शनि बीज मन्त्र
शनि अष्टोत्तरशतनामावली
शनि स्तोत्रम्
शनि चालीसा
शनिवज्रपञ्जर-कवचम्
शनि संबंधी रोग
शनि यंत्र विधान
शनि के रत्न और उपरत्न
शनि की जुड़ी बूटियां
शनि सम्बन्धी व्यापार और नौकरी
शनि सम्बन्धी दान पुण्य
शनि सम्बन्धी वस्तुओं की दानोपचार विधि
शनि ग्रह के द्वारा परेशान करने का कारण
शनि मंत्र