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माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप

 

महाभारत के अनुसार माण्डव्य नाम के एक ऋषि थे। राजा ने भूलवश उन्हें चोरी का दोषी मानकर सूली पर चढ़ाने की सजा दे दी। सूली पर कुछ दिनों तक चढ़े रहने के बाद भी जब उनके प्राण नहीं निकले, तो राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने ऋषि माण्डव्य से क्षमा मांगकर उन्हें छोड़ दिया।

तब ऋषि यमराज के पास पहुंचे और उनसे पूछा कि मैंने अपने जीवन में ऐसा कौन सा अपराध किया था कि मुझे इस प्रकार झूठे आरोप की सजा मिली। तब यमराज ने बताया कि जब आप 12 वर्ष के थे, तब आपने एक फतींगे की पूंछ में सींक चुभाई थी, उसी का नतीजा आपको यह कष्ट सहना पड़ा।तब ऋषि माण्डव्य ने यमराज से कहा कि 12 वर्ष की उम्र में किसी को भी धर्म-अधर्म का ज्ञान नहीं होता। तुमने इतने छोटे अपराध का इतना बड़ा दण्ड दिया है। इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम्हें शुद्र योनि में एक दासी पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ेगा। ऋषि माण्डव्य के इसी श्राप के कारण ही यमराज ने महात्मा विदुर के रूप में जन्म लिया।

 

पुराणों के सबसे प्रसिद्द श्राप

हिंदी संपादक (विशेष लेखन)
Chapters
भूमिका
युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप
ऋषि किंदम का राजा पांडु को श्राप
माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप
नंदी का रावण को श्राप
कद्रू का अपने पुत्रों को श्राप
उर्वशी का अर्जुन को श्राप
तुलसी का भगवान विष्णु को श्राप
श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप
राजा अनरण्य का रावण को श्राप
परशुराम का कर्ण को श्राप
तपस्विनी का रावण को श्राप
गांधारी का श्रीकृष्ण को श्राप
महर्षि वशिष्ठ का वसुओं को श्राप
शूर्पणखा का रावण को श्राप
ऋषियों का साम्ब को श्राप
दक्ष का चंद्रमा को श्राप
माया का रावण को श्राप
शुक्राचार्य का राजा ययाति को श्राप
ब्राह्मण दंपत्ति का राजा दशरथ को श्राप
नंदी का ब्राह्मण कुल को श्राप
नलकुबेर का रावण को श्राप
श्रीकृष्ण का अश्वत्थामा को श्राप
तुलसी का श्रीगणेश को श्राप
नारद का भगवान विष्णु को श्राप
गौतम का इंद्र और अहिल्या को श्राप