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भृगु का श्राप

एक ऐसा समय था जब असुर और देवता हमेशा लड़ते रहते थे | ऐसे ही एक युद्ध में जब असुरों की हार हुई तो शुक्राचार्य ने मृतसंजीवनी स्तोत्रं हासिल करने की सोची | वह तपस्या करने शिव के धाम चल दिए और असुरों से कहा की उनके पिता भृगु के आश्रम में निवास करें |

जब देवताओं को इस बात का पता चला तो वह असुरों को मारने चल दिए | असुर भागे भागे भृगु की पत्नी के पास पहुंचे | वह इंद्र को गतिहीन करने की क्षमता रखती थीं | देवता डर कर विष्णु के पास पहुंचे | विष्णु ने उनसे अपने शरीर में प्रवेश करने को कहा |

भृगु की पत्नी ने विष्णु को ऐसा करने से मना किया इस पर विष्णु ने क्रोधित हो उन्हें सुदर्शन चक्र से मार गिराया | भृगु ने गुस्से में आ विष्णु को श्राप दे दिया की वह पृथ्वी पर जन्म ले बार बार जन्म और मृत्यु के झंझटों में फंसते रहे |इसी वजह से विष्णु ने धरती पर बार बार अवतार लिए और रामायण और महाभारत का जन्म हुआ |