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काल भैरव

काल भैरव शिवजी का एक भयानक रूप हैं और भारत देश में उनकी काफी मान्यता है | दिखने में काफी डरावने बनाये जाने वाले भैरव के हाथ में एक त्रिशूल , डमरू और ब्रह्मा का पांचवा सर होता है | उन्हें मौत को पराजित करने वाला माना जाता है | उनमी तीसरी आँख अखंड ज्ञान का प्रतीक है |भैरव पर शिवजी के आदेश पर ब्रह्मा का पांचवा सर काटने का आरोप है |लेकिन ब्रह्मा का सर काटने का मतलब है ब्राह्मण हत्या का दोष लग्न | इसलिए भैरव को वह सर 12 साल तक रखना पड़ा | वह इधर उधर भटकते रहे जब तक इस गुनाह का पश्चाताप नहीं कर लिया | अक्सर भैरव की मूर्ति को इसी रूप में दर्शाया जाता है |

भैरव की पूजा करने से सफलता और सुख हासिल करना और दुश्मनों को पराजित करना आसान हो जात है | वह भक्तों को समय का सदुपयोग करना सिखाते हैं | इसलिए उन्हें समय का देवता भी कहा जाता है |वह अपने भक्तों के सभी कार्य संभव कराते हैं | श्री भैरव को मंदिर का कोतवाल भी कहते हैं | शिव और शक्ति के मंदिर की चाबियाँ बंद करते समय काल भैरव को सौंपी जाती हैं और सुबह उन्ही से वापस ली जाती है | वह यात्रियों और तीर्थ पर जाने वालों की विशेष रूप से रक्षा करते हैं |