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विदेश नीति

आयरलैंड पर ट्युडरों का आधिपत्य जारी रखते हुए मैरी ने अपने शासनकाल में आयरिश मध्यभूमियों में अपने उपनिवेश स्थापित किये। काउंटी लाओइस और काउंटी ओफ़ाले का गठन हुआ और उनमें खेती प्रारंभ की गयी। इन नगरों को क्रमश: मैरीबोरो (अब पोर्टलुइस) और फ़िलिप्सटाउन (अब डैंगीन) का नाम दिया गया।

जनवरी 1556 में मैरी के ससुर ने गद्दी छोड़ी और फ़िलिप स्पेन के राजा बन गये, साथ ही मैरी स्पेन की पटरानी बनीं। वो अभी भी अलग थे; फ़िलिप को ब्रुसेल्स में राजा घोषित किया गया जबकि मैरी लंदन में ही रहीं। फिलिप ने फ्रांस से कुछ दिनों के लिये फरवरी 1556 में युद्धविराम के लिये बातचीत की। अगले महीने इंग्लैंड में फ्रेंच राजदूत एंटोनी डी नोइलेस को इंग्लैड में मैरी के विरुद्ध षडयंत्र के आरोप में गिरफ्तार किया। नॉर्थम्बरलैंड के मारे गये ड्यूक जॉन डुडली के रिश्ते का भाई हेनरी सुटन डुडली फ्रांस में एक विद्रोही सेना का गठन कर रहा था। डुडली षडयंत्र के नाम से जाना जाने वाली इस साजिश का पटाक्षेप हो गया और इंग्लैंड में डुडली के समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया। नोएलिस ने ब्रिटेन छोड़ दिया और डुडली फ्रांस में निर्वासन में रहा।

फ़िलिप मार्च से जुलाई 1557 तक के लिये इंग्लैंड आ गये और इटली के खिलाफ़ होने वाले स्पेनी युद्ध में इंग्लैंड का समर्थन मांगा। मैरी इसके लिये तैयार थीं लेकिन उनके सलाहकारों ने फ्रांस से होने वाले व्यापार की दुहाई देते हुए ऐसा करने से मना किया। फ्रांस के खिलाफ़ युद्ध में साथ देने से फ्रांस से हुए शादी का अनुबंध टूट जाता और एडवर्ड के शासनकाल से मिली खराब आर्थिक विरासत, कई सालों से हो रही कम पैदावार से पहले से परेशान इंग्लैंड की जनता की फ्रांस से व्यापार खत्म होने की सूरत में परेशानियाँ और बढ जातीं। युद्ध जून १५५७ में ही घोषित हुआ जब रेगिनल्ड पोल के भतीजे और विद्रोही थॉमस स्टैफोर्ड ने फ्रांस की सहायता से मैरी को पदच्युत करने के लिए इंग्लैंड पर चढाई की स्कारबोरो के किले पर कब्जा कर लिया।  युद्ध की वजह से इंग्लैंड और पोप के संबम्धों में तनावा आ गया क्योंकि पोप पॉल षष्टम फ्रांस के राजा हेनरी से साथ थे।  जनवरी १५५८ में फ्रांसीसी सेनाओं ने यूरोप की मुख्य भूमि पर इंग्लैंड के अधिकार वाले एकमात्र बचे कैलेइस को अपने नियम्त्रण में ले लिया। आर्थिक रूप से कमजोर नगर को हारने से कुछ नुकसान तो नहीं होना था लेकिन फिर भी वैचारिक रूप से यह मैरी की हार थी जिसने उनके प्रतिष्ठा व प्रभाव को ठेस पहुंचाई। मैरी को इस हार से गहरा धक्का पहुंचा था।