बेगुनाह या गुनेह्गार हिंदी संपादक (विशेष लेखन)

हांलाकि कानून का काम है सही फैसले देना कई बार ऐसा नहीं हो पाता | ऐसी सूरत में कई बार लोगों को कई साल तक जेल की सजा काटनी पड़ती है उसके बाद उनके हक में फैसला होता है | कई बार तो वो फैसला जब तक आता है व्यक्ति जेल में रहने का आदि हो जाता है या फिर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है | आईये जानते हैं ऐसे ही कुछ पेचीदा केस के बारे में जहाँ लोगों की जिंदगी एक गलत फैसले की वजह से बदल गयी |