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जन्म भूमि से अतिप्रेम

एक नदी के पात्र में अनेक तरह के जिव जंतु रहते थे | वे सारे अपने इच्छा अनुरूप नदी में घूम कर वापस आ जाते थे | इन जिव जंतु को पहले ही पता चल जाता है के कब सूखा पड़ने वाला है | तब सारे जिव जंतु वहा से

सुरक्षित जगह पलायन कर गये | लेकिन वहा एक कछवा था , वो वहा से नहीं भागा | वह सोचता था के उसने वही जन्म लिया , उसके माता पिता भी वही रहते थे और वह युवा भी उसी जगह हुवा था | ऐसे जगह को वह कैसे छोड़ सकता है !
एक दिन कुछ कुम्भार वहा की सुखी चिकनी मिट्टी जमा करने आये | जब वह खुदाई कर रहे थे तब एक प्रहार जोर से मिट्टी में धसे हुवे कछुवे पर पड़ी जो वहा से नहीं भागा था | तब उसे बड़ी पीड़ा से समाझ आया के " वही रहना उचित है जहा चैन मिले चाहे वह जिस प्रकार की जगह रहे , चाहे वह जंगल हो , गाव अथवा जन्मभूमि हो लेकिन जहा आनंद मिलता है , उसी जगह को घर मानकर रहना चाहिए | "