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किरकिरी

कही सारे व्यापारी बहुत परेशानी झेलते हुवे एक गांव से दूसरे गांव की राह पर बहुत सारा सामान लिए बैलगाड़ियों से जा रहे होते है | लेकिन वह राह आसान नहीं थी | कही सारी बधावों का सामना करना पड़ता है | कड़ी धुप के बाद रात में बारिश होती है | दूसरे दिन कीचड़ से राह निकालनी पड़ती है | बैल , व्यापारी से लेकर नौकर चाकर कोई खुश नहीं होता , सब शिकायत करते है | लेकिन जब वह दूसरे गांव पहुंचते है तो सबको काफी सारा मुनाफा मिलता है | सब खूब मजे उड़ाते है और गांव वापस जा रहे होते है लेकिन सिर्फ बैलगाड़ियों के चक्को से कीर कीर कीर कीर की आवाज आती रहती है | तब बैलगाड़ी खींच रहा एक बैल दूसरे समझदार बैल से पूछता है , क्या बात है अब सब खुश है तो ये चक्के किस बात की शिकायत कर रहे है | तब समझदार बैल कहता है , " तुम उनकी तरफ ध्यान मत दो हमें हमेशा ऐसे लोग मिलते ही है जहा सब खुश हो और अच्छा चल रहा हो तो भी ऐसे लोग बिना वजह कीर कीर करेंगे ही | कोई न कोई होता ही है जो किसी भी स्तिति में नाखुश होता है | "