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कलकत्ता से राजधानी दिल्ली बनी

एक आखरी बार दिल्ली को यहाँ बसाया गया |साल 1911 में दिल्ली दरबार बुराड़ी में लगाया गया और सभी राजाओं को न्योता मिला |दिल्ली को रोशन किया गया और जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी की सवारी चांदनी चौक से निकाली गयी |दिल्ली दरबार में जा जॉर्ज पंचम ने दिल्ली को राजधानी घोषित किया |एडविन लुत्येंस ने यहाँ शानदार इमारतों का निर्माण संपन्न करवाया |इन इमारतों के लिए धौलपुर,आगरा और भरतपुर से पत्थर मंगवाया गया |