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किस्सा तीसरे बूढ़े का जिसके साथ एक खच्चर था

तीसरे बूढ़े ने कहना शुरू किया : 'हे दैत्य सम्राट, यह खच्चर मेरी पत्नी है। मैं व्यापारी था। एक बार मैं व्यापार के लिए परदेश गया। जब मैं एक वर्ष बाद घर लौटकर आया तो मैंने देखा कि मेरी पत्नी एक हब्शी गुलाम के पास बैठी हास-विलास और प्रेमालाप कर रही है। यह देखकर मुझे अत्यंत आश्चर्य और क्रोध हुआ और मैंने चाहा कि उन दोनों को दंड दूँ। तभी मेरी पत्नी एक पात्र में जल ले आई और उस पर एक मंत्र फूँक कर उसने मुझ पर अभिमंत्रित जल छिड़क दिया जिससे मैं कुत्ता बन गया। पत्नी ने मुझे घर से भगा दिया और फिर अपने हास-विलास में लग गई।

'मैं इधर-उधर घूमता रहा फिर भूख से व्याकुल होकर एक कसाई की दुकान पर पहुँचा और उसकी फेंकी हुई हड्डियाँ उठाकर खाने लगा। कुछ दिन तक मैं ऐसा ही करता रहा। फिर एक दिन कसाई के साथ उसके घर जा पहुँचा। कसाई की पुत्री मुझे देखकर अंदर चली गई और बहुत देर तक बाहर नहीं निकली। कसाई ने कहा, तू अंदर क्या कर रही है, बाहर क्यों नहीं आती? लड़की बोली, मैं अपरिचित पुरुष के सामने कैसे जाऊँ? कसाई ने इधर-उधर देखकर कहा कि यहाँ तो कोई अपरिचित पुरुष नहीं दिखाई देता, तू किस पुरुष की बात कर रही है?

'लड़की ने कहा, यह कुत्ता जो तुम्हारे साथ घर में आया है तुम्हें इसकी कहानी मालूम नहीं है। यह आदमी है। इसकी पत्नी जादू करने में पारंगत है। उसी ने मंत्र शक्ति से इसे कुत्ता बना दिया है। अगर तुम्हें इस बात पर विश्वास न हो मैं तुरंत ही इसे मनुष्य बना कर दिखा सकती हूँ। कसाई बोला, भगवान के लिए सो ही कर। तू इसे मनुष्य बना दे ताकि यह लोक-परलोक दोनों का धर्म संचित करे।

'यह सुन कर वह लड़की एक पात्र में जल लेकर अंदर से आई और जल को अभिमंत्रित करके मुझ पर छिड़का और बोली, तू इस देह को छोड़ दे और अपने पूर्व रूप में आ जा। उसके इतना कहते ही मैं दुबारा मनुष्य के रूप में आ गया और लड़की फिर परदे के अंदर चली गई। मैंने उसके उपकार से अभिभूl होकर कहा, हे भाग्यवती, तूने मेरा जो उपकार किया है उससे तुझे लोक-परलोक का सतत सुख प्राप्त हो। अब मैं चाहता हूँ कि मेरी पत्नी को भी कुछ ऐसा ही दंड मिले।

'यह सुनकर लड़की ने अपने पिता को अंदर बुलाया और उसके हाथ थोड़ा अभिमंत्रित जल बाहर भिजवाकर बोली, तू इस जल को अपनी पत्नी पर छिड़क देना। फिर तू उसे जो भी देह देना चाहे उस पशु का नाम लेकर स्त्री से कहना कि तू यह हो जा। वह उसी पशु की देह धारण कर लेगी। मैं उस जल को अपने घर ले गया। उस समय मेरी पत्नी सो रही थी। इससे मुझे काम करने का अच्छा मौका मिल गया। मैंने अभिमंत्रित जल के कई छींटे उसके मुँह पर मारे और कहा, तू स्त्री की देह छोड़कर खच्चर बन जा। वह खच्चर बन गई और तब से मैं इसी रूप में अपने साथ लिए घूमता हूँ।'

शहरजाद ने कहा - बादशाह सलामत, जब तीसरा वृद्ध अपनी कहानी कह चुका तो दैत्य को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने खच्चर से पूछा कि क्या यह बात सच है जो यह बूढ़ा कहता है? खच्चर ने सिर हिला कर संकेत दिया कि बात सच्ची है। तत्पश्चात दैत्य ने व्यापारी के अपराध का बचा हुआ तिहाई भाग भी क्षमा कर दिया और उसे बंधनमुक्त कर दिया। उसने व्यापारी से कहा, तुम्हारी जान आज इन्हीं तीन वृद्ध जनों के कारण बची है। यदि ये लोग तुम्हारी सहायता न करते तो तुम आज मारे ही गए थे। अब तुम इन तीनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करो। यह कहने के बाद दैत्य अंतर्ध्यान हो गया। व्यापारी उन तीनों के चरणों में गिर पड़ा। वे लोग उसे आशीर्वाद देकर अपनी-अपनी राह चले गए और व्यापारी भी घर लौट गया और हँसी-खुशी अपने प्रियजनों के साथ रहकर उसने पूरी आयु भोगी।

शहरजाद ने इतना कहने के बाद कहा, 'मैंने जो यह कहानी कही है इससे भी अच्छी एक कहानी जानती हूँ जो एक मछुवारे की है।' बादशाह ने इस पर कुछ नहीं कहा लेकिन दुनियाजाद बोली, 'बहन, अभी तो कुछ रात बाकी है। तुम मछुवारे की कहानी भी शुरू कर दो। मुझे आशा है कि बादशाह सलामत उस कहानी को सुनकर भी प्रसन्न होंगे।' शहरयार ने वह कहानी सुनने की स्वीकृति भी दे दी। शहरजाद ने मछुवारे की कहानी इस प्रकार आरंभ की।

अलिफ लैला

संकलित
Chapters
शहरयार और शाहजमाँ की कहानी
किस्सा तीसरे बूढ़े का जिसके साथ एक खच्चर था
किस्सा दूसरे बूढ़े का जिसके पास दो काले कुत्ते थे
किस्सा व्यापारी और दैत्य का
किस्सा गधे, बैल और उनके मालिक का
किस्सा बूढ़े और उसकी हिरनी का
किस्सा मछुवारे का
किस्सा गरीक बादशाह और हकीम दूबाँ का
किस्सा भद्र पुरुष और उसके तोते का
मजदूर का संक्षिप्त वृत्तांत
किस्सा काले द्वीपों के बादशाह का
किस्सा पहले फकीर का
किस्सा तीन राजकुमारों और पाँच सुंदरियों का
किस्सा दूसरे फकीर का
किस्सा वजीर का
किस्सा भले आदमी और ईर्ष्यालु पुरुष का
किस्सा अमीना का
जवान और मृत स्त्री की कहानी
किस्सा जुबैदा का
किस्सा तीसरे फकीर का
एक स्त्री और तीन नौकरों का वृत्तांत
नूरुद्दीन अली और बदरुद्दीन हसन की कहानी
सिंदबाद जहाजी की पहली यात्रा
किस्सा सिंदबाज जहाजी का
काशगर के दरजी और बादशाह के कुबड़े सेवक की कहानी
सिंदबाद जहाजी की दूसरी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की तीसरी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की छठी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की चौथी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की पाँचवीं यात्रा
सिंदबाद जहाजी की सातवीं यात्रा
ईसाई द्वारा सुनाई गई कहानी
अनाज के व्यापारी की कहानी
काशगर के बादशाह के सामने दरजी की कथा
उस आदमी की कहानी जिसके चारों अँगूठे कटे थे
यहूदी हकीम द्वारा वर्णित कहानी
दरजी की जबानी नाई की कहानी
लँगड़े आदमी की कहानी
नाई के कुबड़े भाई की कहानी
नाई के दूसरे भाई बकबारह की कहानी
नाई के तीसरे भाई अंधे बूबक की कहानी
नाई के चौथे भाई काने अलकूज की कहानी
नाई के पाँचवें भाई अलनसचर की कहानी
नाई के छठे भाई कबक की कहानी
अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी
कमरुज्जमाँ और बदौरा की कहानी
नूरुद्दीन और पारस देश की दासी की कहानी
ईरानी बादशाह बद्र और शमंदाल की शहजादी की कहानी
गनीम और फितना की कहानी
शहजादा जैनुस्सनम और जिन्नों के बादशाह की कहानी
शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कथा
दरियाबार की शहजादी की कहानी
सोते-जागते आदमी की कहानी
अलादीन और जादुई चिराग की कथा
खलीफा हारूँ रशीद और बाबा अब्दुल्ला की कहानी
अंधे बाबा अब्दुल्ला की कहानी
सीदी नोमान की कहानी
ख्वाजा हसन हव्वाल की कहानी
अलीबाबा और चालीस लुटेरों की कहानी
बगदाद के व्यापारी अली ख्वाजा की कहानी