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काशगर के बादशाह के सामने दरजी की कथा

दरजी ने कहा कि इस नगर के व्यापारी ने एक बार अपने मित्रों को भोज दिया और उनके लिए भाँति-भाँति के व्यंजन बनवाए। मुझे भी बुलाया गया। मैं जब वहाँ पहुँचा तो देखा कि बहुत-से निमंत्रित लोग मौजूद हैं किंतु मकान मालिक नहीं है। थोड़ी देर में हम लोगों ने देखा कि मकान मालिक एक लँगड़े किंतु अति सुंदर व्यक्ति को ले कर यहाँ आया और अतिथियों के बीच बैठ गया। लँगड़ा आदमी वहाँ बैठनेवाला ही था कि उस की दृष्टि वहाँ पर उपस्थित एक नाई पर पड़ी। वह बैठने के बजाय सभा से बाहर जाने लगा। आतिथ्यकर्ता व्यापारी ने आश्चर्य से पूछा कि मित्र, तुम जा क्यों रहे हो, अभी भोजन आनेवाला है, तुम भोजन के बिना कैसे चले जाओगे। किंतु उस लँगड़े ने, जो परेदशी जान पड़ता था, कहा, 'श्रीमान, मुझे आपके घर पर ठहर कर मरने की इच्छा नहीं है। मैं इस मनहूस नाई का मुँह नहीं देखना चाहता जिसे आप ने अपनी दावत में बुलाया है। मुझे जाने ही दीजिए।'

दरजी ने कहा कि उस लँगड़े की यह बात सुन कर हम सब को और भी आश्चर्य हुआ। हमारी समझ में नहीं आ रहा था कि उस नाई से उस लँगड़े को इतनी नाराजगी किस कारण हो सकती है।

हम लोग उत्सुकतावश उस लँगड़े के चारों ओर जमा हो गए और पूछने लगे कि क्या बात है। उस लँगड़े ने कहा, 'मित्रो, मैं इसी कमबख्त नाई के कारण लँगड़ा हुआ हूँ और इस के कारण अन्य विपत्तियाँ भी झेली हैं। मैं ने प्रण किया था कि न केवल इसका मुख न देखूँगा बल्कि यह जहाँ रहेगा वहाँ रहूँगा भी नहीं। मैं बगदाद का रहनेवाला हूँ, मैं ने बगदाद नगर इसीलिए छोड़ा कि यह वहाँ रहता था। अपने नगर को छोड़ कर मैं यहाँ आया, लेकिन यह मेरी जान का दुश्मन यहाँ भी मौजूद है। इसीलिए अब मैं इस सभा या इस नगर में बिल्कुल नहीं ठहर सकता। मुझे आप लोग क्षमा करें। मुझे यह देश छोड़ना पड़ेगा वरना यह दुष्ट न जाने मेरी क्या-क्या दुर्गति करेगा।'

यह कह कर लँगड़ा अतिथि गृह स्वामी की अनुमति के बगैर ही सभा से बाहर जाने लगा। हम लोगों ने उसे दौड़ कर रोका और दूसरे मकान में ले जा कर भोजन कराया। फिर गृह स्वामी ने कहा कि कृपापूर्वक हमें यह बताएँ कि इस नाई ने आपके साथ क्या दुष्टता की है। वह बड़ी मुश्किल से यह कहानी कहने को तैयार हुआ, लेकिन कहानी सुनाते समय नाई की ओर पीठ करके बैठ गया। नाई भी सिर झुकाए हुए चुपचाप सब कुछ सुनता रहा। लँगड़े ने अपना वृत्तांत इस प्रकार कहा।

अलिफ लैला

संकलित
Chapters
शहरयार और शाहजमाँ की कहानी
किस्सा तीसरे बूढ़े का जिसके साथ एक खच्चर था
किस्सा दूसरे बूढ़े का जिसके पास दो काले कुत्ते थे
किस्सा व्यापारी और दैत्य का
किस्सा गधे, बैल और उनके मालिक का
किस्सा बूढ़े और उसकी हिरनी का
किस्सा मछुवारे का
किस्सा गरीक बादशाह और हकीम दूबाँ का
किस्सा भद्र पुरुष और उसके तोते का
मजदूर का संक्षिप्त वृत्तांत
किस्सा काले द्वीपों के बादशाह का
किस्सा पहले फकीर का
किस्सा तीन राजकुमारों और पाँच सुंदरियों का
किस्सा दूसरे फकीर का
किस्सा वजीर का
किस्सा भले आदमी और ईर्ष्यालु पुरुष का
किस्सा अमीना का
जवान और मृत स्त्री की कहानी
किस्सा जुबैदा का
किस्सा तीसरे फकीर का
एक स्त्री और तीन नौकरों का वृत्तांत
नूरुद्दीन अली और बदरुद्दीन हसन की कहानी
सिंदबाद जहाजी की पहली यात्रा
किस्सा सिंदबाज जहाजी का
काशगर के दरजी और बादशाह के कुबड़े सेवक की कहानी
सिंदबाद जहाजी की दूसरी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की तीसरी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की छठी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की चौथी यात्रा
सिंदबाद जहाजी की पाँचवीं यात्रा
सिंदबाद जहाजी की सातवीं यात्रा
ईसाई द्वारा सुनाई गई कहानी
अनाज के व्यापारी की कहानी
काशगर के बादशाह के सामने दरजी की कथा
उस आदमी की कहानी जिसके चारों अँगूठे कटे थे
यहूदी हकीम द्वारा वर्णित कहानी
दरजी की जबानी नाई की कहानी
लँगड़े आदमी की कहानी
नाई के कुबड़े भाई की कहानी
नाई के दूसरे भाई बकबारह की कहानी
नाई के तीसरे भाई अंधे बूबक की कहानी
नाई के चौथे भाई काने अलकूज की कहानी
नाई के पाँचवें भाई अलनसचर की कहानी
नाई के छठे भाई कबक की कहानी
अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी
कमरुज्जमाँ और बदौरा की कहानी
नूरुद्दीन और पारस देश की दासी की कहानी
ईरानी बादशाह बद्र और शमंदाल की शहजादी की कहानी
गनीम और फितना की कहानी
शहजादा जैनुस्सनम और जिन्नों के बादशाह की कहानी
शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कथा
दरियाबार की शहजादी की कहानी
सोते-जागते आदमी की कहानी
अलादीन और जादुई चिराग की कथा
खलीफा हारूँ रशीद और बाबा अब्दुल्ला की कहानी
अंधे बाबा अब्दुल्ला की कहानी
सीदी नोमान की कहानी
ख्वाजा हसन हव्वाल की कहानी
अलीबाबा और चालीस लुटेरों की कहानी
बगदाद के व्यापारी अली ख्वाजा की कहानी