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बुद्ध प्रतिमायें

बौद्ध ब्रह्माडिकी को पत्थर पर उतारने की कहानी के अतिरिक्त भी बोरोबुदुर में बुद्ध की विभिन्न मूर्तियाँ मौजूद हैं। इसमें पैर पर पैर रखकर पद्मासन स्थिति वाली मूर्तियाँ पाँच वर्गाकार चबूतरों पर (रुपधातु स्तर) के साथ-साथ उपरी चबूतरे (अरुपधातू स्तर) मौजूद हैं।

रुपधातु स्तर पर देवली में बुद्ध की प्रतिमायें स्तंभवेष्टन (वेदिका) के बाहर पंक्तियों में क्रमबद्ध हैं जिसमें उपरी स्तर पर मूर्तियों की संख्या लगातार कम होती है। प्रथम वेदिका में १०४ देवली, दूसरी में ८८, तीसरी में ७२, चौथी में ७२ और पाँचवी में ६४ देवली हैं। कुल मिलाकर रुपधातु स्तर तक ४३२ बुद्ध की मूर्तियाँ हैं।अरुपधातु स्तर (अथवा तीन वृत्ताकार चबूतरों पर) पर बुद्ध की मूर्तियाँ स्तूपों के अन्दर स्थित हैं। इसके प्रथम वृत्ताकार चबूतरे पर ३२ स्तूप, दूसरे पर २४ और तीसरे पर १६ स्तूप हैं जिसका कुल ७२ स्तूप होता है। मूल ५०४ बुद्ध मूर्तियों में से ३०० से अधिक क्षतिग्रस्थ (अधिकतर का सिर गायब है) हो चुकी हैं और ४३ मूर्तियाँ गुम हैं। स्मारक की खोज होने तक मूर्तियों के सिर पाश्चात्य संग्राहलयों द्वारा संग्रह की वस्तु के रूप में चोरी कर लिया। बोरोबुदुर से बुद्ध की मूर्तियों के इन शिर्षमुखों में से कुछ अब ऐम्स्टर्डैम के ट्रोपेन म्यूजियम और लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय सहित विभिन्न संग्राहलयों में देखे जा सकते हैं।


ट्रोपेनमुसुम, एम्स्टर्डम में बोरोबुदुर बुद्ध प्रतिमा का मस्तिष्क।


बोरोबुदुर में मस्तिष्क रहित बुद्ध की मूर्ति, इसकी खोज के बाद कई मूर्तियाँ विदेशों में संग्राहलयों में रखने के लिए चोरी हो गई।


शेर द्वारपाल

पहली नज़र में बुद्ध की सभी मूर्तियाँ समरूप प्रतीत होती हैं लेकिन उन सभी मुर्तियों की मुद्रा अथवा हाथों की स्थिति में अल्प भिन्नता है। इनमें मुद्रा के पाँच समूह हैं: उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और शिरोबिंदु। ये सभी मुद्रायें महायान के अनुसार पाँच क्रममुक्त दिक्सूचक को निरुपित करती हैं। प्रथम चार वेदिकाओं में पहली चार मुद्रायें (उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम) में प्रत्येक मूर्ति कम्पास की एक दिशा को निरुपित करता है। पाँचवी वेदिका में बुद्ध की मूर्ति और उपरी चबूतरे के ७२ स्तूपो में स्थित मूर्तियाँ समान मुद्रा (शिरोबिंदु) में हैं। प्रत्येक मुद्रा में 'पाँच ध्यानी बुद्ध' में से किसी एक को निरूपित करती है जिनमें प्रत्येक का अपना प्रतीकवाद है।

प्रदक्षिणा अथवा दक्षिणावर्त परिक्रमा (घड़ी की दिशा में परिक्रमा) के अनुसार पूर्व से आरम्भ करते हुये बोरोबुदुर में बुद्ध की मुर्तियों की मुद्रा निम्न प्रकार है: