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तेज लिंग

ओक के मुताबिक ताजमहल का निर्माण 1155 में राजा परमर्दिदेव के शासन में हुआ था |बाद में मुहम्मद घोरी और अन्य मुस्लिम हमलावरों ने उसको तहस नहस कर दिया |विश्वकर्मा की पुस्तक वास्तुशास्त्र में तेज लिंग नाम की शिवलिंग का ज़िक्र है |क्यूंकि ताजमहल में वही लिंग प्रतिष्टित है इसलिए उसका नाम तेजो महालय पड़ गया जिसको बाद में ताज महल में बदल दिया गया |जिस स्थान पर मुमताज़ को दफ़न किया गया वहां की दीवारों पर संगमरमर का पत्थर लगा है | जबकि अन्य कमरों में नक्काशी की गयी है |संगमरमर की जाली में 108 कलश का चित्रण है और हिन्दू परंपरा में 108 अंक का विशेष महत्त्व है |