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CID- अंधेरी के अंधेरे में!

एक बार मुंबई के अंधेरी इलाके में एक सोसायटी में लाईट चली जाती है. 

"लगता है CID को काॅ‌ल करना पडेगा"

एक फ्‍लॅट से एक आदमी CID को काॅल करता है.

"हॅलो CID हमारे सोसायटी से लाईट गुम हो गयी है. सब अंधेरे में बैठे है. आप जल्दी आ जाए."

अभिजित कहता है, "हॅ? लाईट चली गयी? ठीक है. हम आ रहे है"

सोसायटी के आगे CID की गाडी खडी होती है और प्रद्युम्न, दया, सचिन, तारिका, जयवंती, अभिजित, फ्रेडी उतरते है. फ्रेडी टाॅर्च जलाता है.

प्रद्युम्न: "सोसायटी का गेट तोड दो दया"

दया: "लेकीन सर, गेट पहले से ही खुला है"

ACP प्रद्युम्न: "तो चलो अंदर सब"

सोसायटी के सारे लोग पार्कींग मे खडे है.

अभिजित: "तुम मे से कोई बाहर नही जायेगा. सब यही रहेंगे. इन सब के अंगुठे के निशान लेलो""

सोसायटी चेयरमन: "लेकीन हम कही नही जा रहे है. सब यही है. हमने कुछ नही किया."

ACP प्रद्युम्न: "तुम में से किसीने लाईट को जाते हुए देखा?"

सब CID से डर जाते है. कोई कुछ नही बोलता.

सोसायटी का एक छोटा बच्चा सामने आता है.

"अंकल, मैने देखा लाईट को जाते हुए."

दया:" अरे वा. कितना बहादूर बच्चा है. अब बताओ, तुमने लाईट को कहाँ जाते हुए देखा? "

बच्चा: "मै अपना होमवर्क कर रहा था. अचानक मैने देखा की बिजली अचानक खिडकी में से भाग गयी और अंधेरा हो गया "

ACP प्रद्युम्न: "जयवंती और तारिका, ढूँढो उस बिजली को. ज्यादा दूर नही गयी होगी. लेकिन ये बिजली गयी तो गयी कहाँ दया?"

सचिन: "सर सर, मुझे पता है. अक्सर बिजली जब जाती है तो अक्सर MSEB के आॅफीस वापस जाती है."

ACP प्रद्युम्न: "MSEB के आॅफीस वापस जाती है? अच्छा!!?"

अभिजित: "तो इसका मतलब बिजली जरूर MSEB गयी होगी सर!"

फ्रेडी: "सर मुझे डर लग रहा है. कोई भूत आ गया तो?"

अभिजित: "फ्रेडी डरो मत. CID के होते हुए भूतों की क्या जरूरत? जहाँ CID होते है, वहाँ भूत नही आते, समझे?"

थोडी देर बाद जयवंती और तारिका वायरमन को पकडकर लाती है. 

"सर, बिजली तो नही मिली लेकिन ये इलेक्ट्रिशियन मिला है, ये कहता है की ये लायेगा बिजली को वापस. इसीने चुपचाप सोसायटी मे आकर बिजली की तार काट दी थी."

दया उसे दो थप्पड लगाता है.

"बोलो, बिजली वापस लाते हो की नही?"

इलेक्ट्रिशियन: " सर दया करो. बिना बात के मारते हो. मैने ना कब बोला, जो मार रहे हो? अब झंडू बाम का पैसा मै आपसे लूँगा."

दया: "चलो चलो ठीक है!"

इलेक्ट्रिशियन मिटर का फाॅल्ट ठीक करता है और लाईट आती है. 

जैसे CID जाने लगती है तो सोसायटी वाले बोलते है,

"सर आप लोग अभी आये ही है तो सोनी पे CID सिरीयल देख के जाये. रात के दस बज गये है"

ACP प्रद्युम्न: "चलो अभिजित, देखते तो है ये CID सिरीयल आखिर होता क्या है?"

CID- अंधेरी के अंधेरे में!

Nimish Navneet Sonar
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CID- अंधेरी के अंधेरे में!