रावण का शोक

रावण अपनी अभिसारिका दैत्यबाला की मृत्यु से व्यथित है। वह एकाकी समुद्र-तीर पर चित्त शान्त करने आया है। उसे दैत्यबाला के साहस और उत्सर्ग की याद आती है।