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चित्रकूट

जब श्री राम अपने वनवास के लिए निकले तो वह सबसे पहले प्रयाग पहुंचे | वहां उन्होनें गंगा स्नान किया उसके बाद यमुना नदी को पार कर वह चित्रकूट में अपनी कुटिया बनाने पहुंचे |यहाँ यूँ तो कई सारे स्मारक बने हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है वाल्मीकि आश्रम ,मांडव्य आश्रम और भरतकूप |चित्रकूट में राम अनुसूया के आश्रम में काफी दिनों तक रहे थे |यहाँ के रामघाट, जानकी कुंड, हनुमानधारा, गुप्त गोदावरी मशहूर हैं और राम की वहां रहने का सबूत पेश करते हैं |