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महिषासुर का अंत

एक बार एक महिषासुर नाम का दैत्य रहता था | उसने तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया |ब्रह्मा जी के प्रकट होने पर उसने वर माँगा की उसे सब तरह की जादुई शक्तियां मिलें और उसे एक औरत के इलावा कोई न मार सके |इस के बाद महिषासुर ने सब क्षेत्रों से सारे राक्षस सेना को इकठ्ठा किया और तीनों दुनिया पर कब्ज़ा कर इंद्र को स्वर्ग से बाहर फ़ेंक दिया | 

देवताओं ने जा कर त्रिमूर्ति से गुज़ारिश की | उनकी बातें  सुन त्रिमूर्ति को गुस्सा आया और उनके गुस्से से निकली रौशनी ने एक औरत का रूप ले लिए |सभी भगवानों ने उसको नए कपडे , जेवर , मुकुट , सवारी के लिए शेर , हथियार इत्यादि भेंट किये |फिर देवताओं ने उससे महिषासुर को मारने की विनती की | उसका नाम भगवान विष्णु ने दुर्गा रखा | 

महिषासुर को जब इस देवी के बारे में ज्ञात हुआ तो उसने उसको तलाशना शुरू किया | तलाश के अंत में उसे दुर्गा माँ शेर पर बैठी दिखाई दें | उनकी ख़ूबसूरती देख वो हैरान रह गया और उसने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा | देवी दुर्गा ने उससे युद्ध करने की बात की | पर महिषासुर ने कहा वह इतनी सुन्दर लड़की से कैसे युद्ध कर सकता है | तब देवी उससे कहती हैं की अगर युद्ध में वो जीत जाता है तो देवी उससे शादी कर लेंगी |

इस तरह उनका युद्ध शुरू होता है | शुरू में महिषासुर को लगता है की वह देवी से जीत जाएगा लेकिन अंत में देवी उसकी सारी शक्ति क्षीण कर देती हैं और उसका अंत कर देती हैं |नवरात्री का त्यौहार इसी अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है |देवी ने ९ रातें लड़ने के बाद महिषासुर को पराजित किया इसलिए इस त्यौहार को मनाया जाता है |