कुंती-माद्री

एक ओर गांधारी थी जिसके 100 पुत्रों के पालन-पोषण में राजपाट लगा था तो दूसरी ओर कुंती थी, जो अकेली ही अपने 5 पुत्रों का लालन-पालन कर रही थी। कुंती ने अपने पुत्रों को जो संस्कार और शिक्षा दी वह उल्लेखनीय और प्रशंसनीय थे ।