महिषासुर
असुर सम्राट रंभ और उसके भाई करंभ ने अग्नि और वरुण देव को प्रसन्न कर उनसे वरदान प्राप्त किया था। जहां अग्निदेव को प्रसन्न करने के लिए असुर रंभ ने आग के छल्ले में बैठकर कठोर तप किया था, वहीं करंभ ने जल के भीतर रहकर वरुण देव के लिए तपस्या की थी। अंत में इन्द्रदेव ने मगरमच्छ का रूप लेकर करंभ का वध किया था और बाद में इन्द्र के वज्र के वार से रंभ की मृत्यु हुई थी। पानी में रहने वाली भैंस और असुर सम्राट रंभ की संतान महिषासुर ने भी घोर तपस्या की।