नहीं किया था राम ने सीता का परित्याग
पहले रामायण में 6 कांडों होते थे , और उसमें उत्तरकांड नहीं होता था। फिर बौद्धकाल में राम और सीता के बारे में सच-झूठ लिखकर उत्तरकांड जोड़ दिया गया। उस काल के बाद से ही इस कांड पर विद्वानों ने घोर विरोध जताया था, लेकिन इस उत्तरकांड के चलते साहित्यकारों, कवियों और उपन्यासकारों को लिखने के लिए एक नया मुद्दा मिल गया और इस तरह राम धीरे-धीरे बदनाम होते गए। इसी उत्तरकांड को तुलसीदास ने लव-कुश कांड नाम से लिखा और कहानी को और विस्तार दिया।