श्री लंका मेटीओराईट फॉसिल
जो एक सामान्य सा उल्का लग रहा था वह मानवता के इतिहास में दुसरे गृह के जीवों को समझने का एक मात्र साक्ष्य हो सकता है | कैसे ? ये कहानी शुरू हुई २९ दिसम्बर २०१२ में जब श्री लंका के पोलोंनारुवा शहर में एक उल्का के टुकड़े आकर गिरे | स्थानीय पुलिस अधिकारीयों ने तुरंत उन टुकड़ों को देश के चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ,जो की श्री लंकन स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा था, को भेज दिए | इन टुकड़ों को इसके बाद कार्डिफ विश्वविद्यालय भेजा गया जहाँ उनका विस्तृत रूप से दुबारा अध्ययन किया गया |