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मीराबाई

by वीरभद्र

मीराबाई जितनी लोकचर्चित है उतना ही उसका जीवनवृत्त अनबुझ पहेली बना हुआ है। वह राजकुल की जितनी मर्यादा में रही उतनी ही लोककुल की गगा बन भक्ति रस में लवलीन रही। यही कारण है कि बहुत कुछ कहने के बावजूद भी उसके सबंध में बहुत कुछ कहना ओर शेष रह गया है। यह एक ऐसी अद्भुत नारी है जिसके सबंध मे इतना अधिक लिखा जाता रहने पर भी कोई लेखन पूर्णता को प्राप्त नहीं होगा और मीरा नित नई होकर उभरती रहेगी।

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