Bookstruck
Cover of रंग पंचमी

रंग पंचमी

by परम

महाराष्ट्र में होली के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है। यह रंग सामान्य रूप से सूखा गुलाल होता है। विशेष भोजन बनाया जाता है जिसमे पूरनपोली अवश्य होती है। मछुआरों की बस्ती मे इस त्योहार का मतलब नाच, गाना और मस्ती होता है। ये मौसम रिशते (शादी) तय करने के लिये मुआफिक होता है, क्योंकि सारे मछुआरे इस त्योहार पर एक दूसरे के घरों को मिलने जाते है और काफी समय मस्ती मे व्यतीत करते हैं। राजस्थान में इस अवसर पर विशेष रूप से जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों में डूबा वातावरण देखते ही बनता है जब कि हवा में लाला नारंगी और फ़िरोज़ी रंग उड़ाए जाते हैं। मध्यप्रदेश के नगर इंदौर में इस दिन सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित जल छिड़का जाता है। लगभग पूरे मालवा प्रदेश में होली पर जलूस निकालने की परंपरा है। जिसे गेर कहते हैं। जलूस में बैंड-बाजे-नाच-गाने सब शामिल होते हैं। नगर निगम के फ़ायर फ़ाइटरों के वाॅटर (पानी) ट्रकों में रंगीन पानी भर कर जुलूस के तमाम रास्ते भर लोगों पर रंग डाला जाता है। जुलूस में हर धर्म के, हर राजनीतिक पार्टी के लोग शामिल होते हैं, प्राय: महापौर (मेयर) ही जुलूस का नेतृत्व करता है। प्राचीनकाल में जब होली का पर्व कई दिनों तक मनाया जाता था तब रंगपंचमी होली का अंतिम दिन होता था और उसके बाद कोई रंग नहीं खेलता था।

Chapters

Related Books

Cover of हिंदी आरती संग्रह

हिंदी आरती संग्रह

by संकलित

Cover of कहानियाँ

कहानियाँ

by शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

Cover of श्रीकान्त

श्रीकान्त

by शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

Cover of पथ के दावेदार

पथ के दावेदार

by शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

Cover of मानसरोवर

मानसरोवर

by प्रेमचंद

Cover of गोदान

गोदान

by प्रेमचंद

Cover of वरदान

वरदान

by प्रेमचंद

Cover of मंगलसूत्र

मंगलसूत्र

by प्रेमचंद

Cover of प्रेमचन्द की रचनाएँ

प्रेमचन्द की रचनाएँ

by प्रेमचंद

Cover of प्रेमा

प्रेमा

by प्रेमचंद