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Chapters
आवो भाई सब मिल बोलो
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हे पिंजरे की ये मैना
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हरी नाम सुमर सुखधाम
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भज ले क्यूँ न राधे कृष्णा
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दिन नीके बीते जाते हैं
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राम गुण गायो नहीं
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लेल्योजी लेल्योजी थे
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श्रीवृन्दावन-धाम अपार
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बोलो राम राम राम राम
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बोल हरि बोल, हरि हरि
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तेरी पार करैगो नैया
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सीताराम सीताराम सीताराम
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रे मन-प्रति-स्वाँस पुकार यही
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गोविन्द जय-जय गोपाल जय-जय
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जग असार में सार रसना
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तेरी बन जैहैं गोविन्द
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भजता क्यूँ ना रे हरिन
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भजो रे मन राम-नाम
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तू राम भजन कर प्राणी
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सोइ रसना, जो हरि-गुन गावैं
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चाहता जो परम सुख तूँ
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राम कहो राम कहो राम
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जाउँ कहाँ तजि चरन तुम
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प्यारे! जरा तो मन में
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हरे राम हरे राम राम
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सुरता राम भजाँ सुख पाओ
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मीठी रस से भरी
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तुम उठो सिया सिंगार करो
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श्री गणेश वंदना
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गणपति गणेश
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आओ रामा भोग लगाओ श्यामा
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चालो रे सखियाँ चलो
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गाइए गणपति जग वंदन
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बीत गये दिन
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जब से लगन लगी प्रभु तेरी
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भगवान मेरी नैया
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शरण में आये हैं
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सुर की गति मैं
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हर सांस में हर बोल में
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प्रभु को बिसार
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पितु मातु सहायक स्वामी
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रे मन हरि सुमिरन करि लीजै
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श्याम आये नैनों में
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तुम मेरी राखो लाज हरि
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अंखियाँ हरि दरसन की प्यासी
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नाच्यो बहुत गोपाल
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प्रभु तेरो नाम
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हरि, पतित पावन सुने
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दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये
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हे गोविन्द राखो शरन
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हमें नन्द नन्दन मोल लियो
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राधा रास बिहारी मोरे मन में आन समाये
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हे रोम रोम में
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राम सुमिर राम सुमिर
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जय राम रमारमनं शमनं
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सर्व शक्तिमते परमात्मने
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आराध्य श्रीराम
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मनवा मेरा कब से प्यासा
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जागो बंसीवारे ललना
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दुखियों के दुख दूर करे
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मुकुन्द माधव गोविन्द
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आओ आओ यशोदा के लाल
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कन्हैया कन्हैया तुझे आना पड़ेगा
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करुणा भरी पुकार सुन
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प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर
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सुख-वरण प्रभु, नारायण
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कविता कोश विशेष क्यों है? कविता कोश परिवार Roman सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये
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सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे
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राम करे सो होय रे मनवा
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हरि भजन बिना सुख शान्ति नहीं
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परसत पद पावन
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जय जय गिरिबरराज किसोरी
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पात भरी सहरी
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कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावे
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दूलह राम सीय दुलही री
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पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं
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रघुवर की सुधि आई
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गुरु बिन कौन सम्हारे
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गुरु चरनन में ध्यान लगाऊं
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गुरु आज्ञा में निश दिन रहिये
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शुभ दिन प्रथम गणेश मनाओ
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गणपति बप्पा की जय बोलो
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राम दो निज चरणों में स्थान
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राम राम काहे ना बोले
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अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो
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दाता राम दिये ही जाता
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भज मन मेरे राम नाम तू
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राम बिराजो हृदय भवन में
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रामहि राम बस रामहि राम
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राम बोलो राम
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हरि तुम हरो जन की भीर
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राम बिनु तन को
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घूँघट का पट खोल रे
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नारायण जिनके हिरदय में
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गुरु चरनन मे शीश झुकाले
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मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे
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अमृत वाणी
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रघुबर तुमको मेरी लाज
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नाम जपन क्यों छोड़ दिया
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यही वर दो मेरे राम
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रोम रोम में रमा हुआ है
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हरि हरि हरि हरि सुमिरन करो
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नमामि अम्बे दीन वत्सले
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श्री राधा कृष्णाय नमः
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राधे राधे
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आनन्दमयी माँ
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पाई न केहिं गति
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नवधा भक्ति
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राधे रानी की जय
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प्रात पुनीत काल प्रभु जागे
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नंद बाबाजी को छैया
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बधैया बाजे आंगने में बधैया बाजे
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बंशी बजाके श्यामने
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बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
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बोले बोले रे राम चिरैया रे
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दरशन दीजो आय प्यारे
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दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे
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गौरीनंदन गजानना हे दुःखभंजन गजानना
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हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम
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हे जगत्राता विश्वविधाता
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हमको मनकी शक्ति देना
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जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
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जानकी नाथ सहाय करें
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ज्योत से ज्योत जगाते चलो
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मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ
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मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
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मेरा राम सब दुखियों का सहारा है
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मेरे मन में हैं राम मेरे तन में है राम
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नैन हीन को राह दिखा प्रभु
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नैया पड़ी मंझधार गुरु बिन कैसे लागे पार
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न मैं धन चाहूँ, न रतन चाहूँ
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पढ़ो पोथी में राम लिखो तख्ती पे राम
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पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
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प्रभु हम पे कृपा करना
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प्रेम मुदित मन से कहो राम राम राम
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रघुकुल प्रगटे हैं रघुबीर
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रघुपति राघव राजा राम
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ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां
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भज मन राम चरण सुखदाई
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राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत
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राम नाम रस पीजे
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राम राम राम राम राम राम रट रे
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राम से बड़ा राम का नाम
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रंगवाले देर क्या है
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शंकर शिव शम्भु साधु
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श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन
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तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार
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तेरे दर को छोड़ के किस दर जाऊं मैं
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तू ही बन जा मेरा मांझी
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तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो
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तुम तजि और कौन पै जाऊं
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उद्धार करो भगवान
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वैश्णव जन तो तेने कहिये जे
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छोटी छोटी गैयाँ, छोटे छोटे ग्वाल
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वीर हनुमाना अति बलवाना
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मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान तुम्हारे चरणों मे
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उठ जाग मुसाफिर भोर भई
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भगवान तुम्हारे मन्दिर में...
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राधे तू राधे
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कभी राम बनके कभी श्याम बनके
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महियारी का भेष बनाया
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भजो राधे गोविंदा
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