निकोहिश है सज़ा, फ़रियादी-ए-बेदाद-ए-दिलबर की

निकोहिश[1] है सज़ा, फ़रियादी-ए-बे-दाद-ए-दिलबर[2] की
मबादा[3] ख़न्दा-ए-दनदां-नुमा[4] हो सुबह महशर[5] की

रग-ए-लैला, को ख़ाक-ए-दश्त-ए-मजनूं[6] रेशगी[7] बख़्शे
अगर बोवे बजा-ए-दाना[8] दहक़ां[9], नोक नश्तर की

पर-ए-परवाना[10] शायद बादबान-ए-किश्ती-ए-मै[11] था
हुई मजलिस की गरमी से रवानी[12] दौर-ए-साग़र[13] की

करूं बे-दाद-ए-ज़ौक़-ए-पर-फ़िशानी[14] अ़रज़ क्या, क़ुदरत
कि ताक़त उड़ गई उड़ने से पहले मेरे शह-पर[15] की

कहां तक रोऊं उस के ख़ेमे के पीछे, क़यामत है
मेरी क़िस्मत में, या रब !, क्या न थी दीवार पत्थर की

शब्दार्थ:
  1. बदनामी
  2. दिल चोरी करने वाले के जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वाला
  3. इस डर से
  4. दाँत दिखाते हुए मुस्कराना
  5. क़यामत
  6. मजनूं के रेगिस्तान की मिट्टी
  7. कुछ भी याद न रहने की दशा
  8. बीज की जगह
  9. किसान
  10. पतंगे का पँख
  11. शराब की नाव का पाल
  12. चल पड़ना
  13. सुराही
  14. पर फड़फड़ाने की ज़ालिम इच्छा
  15. पँख