जहां तेरा नक़्शे-क़दम

जहां तेरा नक़्शे-क़दम[1] देखते हैं
ख़ियाबां-ख़ियाबां[2] इरम[3] देखते हैं

दिल-आशुफ़्तगां[4] ख़ाले-कुंजे-दहन[5] के
सुवैदा[6] में सैरे-अ़दम[7] देखते हैं

तेरे सर्वे-क़ामत[8] से इक क़द्दे-आदम[9]
क़यामत के फ़ित्ने[10] को कम देखते हैं

तमाशा कर ऐ महवे-आईनादारी[11]
तुझे किस तमन्ना से हम देखते हैं

सुराग़े-तुफ़े-नाला[12] ले दाग़े-दिल से
कि शब-रौ[13] का नक़्शे-क़दम देखते हैं

बना कर फ़क़ीरों का हम भेस ग़ालिब
तमाशा-ए-अहले-करम[14] देखते हैं

शब्दार्थ:
  1. ↑ पदचिन्ह
  2. ↑ क्यारी-क्यारी
  3. ↑ स्वर्ग
  4. ↑ परेशान-हाल
  5. ↑ अधर के कोने का तिल
  6. ↑ दिल का दाग़
  7. ↑ अनस्तित्व का तमाशा
  8. ↑ सर्व के पेड़ जैसा लंबा कद
  9. ↑ मनुष्य के क़द जितना
  10. ↑ उपद्रव
  11. ↑ आईना देखने में मस्त
  12. ↑ आह की गर्मी का पता
  13. ↑ रात का राही
  14. ↑ दानियों का तमाशा