इश्क़ तासीर से नौमेद नहीं

इश्क़ तासीर[1] से नोमीद[2] नहीं
जां-सुपारी[3] शजर-ए-बेद[4] नहीं

सल्तनत दस्त-ब-दस्त आई है
जाम-ए-मै ख़ातिम-ए-जमशेद[5] नहीं

है तजल्ली[6] तेरी सामाने-वजूद
ज़र्रा बे-परतवे-ख़ुर्शीद[7] नहीं

राज़-ए-माशूक़ न रुसवा हो जाये
वर्ना मर जाने में कुछ भेद नहीं

गर्दिश-ए-रंग-ए-तरब[8] से डर है
ग़म-ए-महरूमी-ए-जावेद[9] नहीं

कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग
हम को जीने की भी उम्मीद नहीं

शब्दार्थ:
  1. ↑ प्रभाव
  2. ↑ निराश
  3. ↑ जान निछावर करना
  4. ↑ बेद का फल (निष्फल)
  5. ↑ जमशेद बादशाह की अंगूठी
  6. ↑ प्रकाश
  7. ↑ सूरज के आलोक के बिना
  8. ↑ बदनाम
  9. ↑ आनन्द के परिवर्तनशील