हवस को है निशात-ए-कार
हवस[1] को है निशाते-कार[2] क्या क्या
न हो मरना तो जीने का मज़ा क्या
तजाहुल-पेशगी[3] से मुद्दआ[4] क्या
कहां तक ऐ सरापा-नाज़[5] क्या-क्या
नवाज़िश-हाए-बेजा[6] देखता हूं
शिकायत-हाए-रंगीं का गिला क्या
निगाह-ए-बेमुहाबा[7] चाहता हूं
तग़ाफ़ुल-हाए-तमकीं-आज़मा[8] क्या
फ़रोग़-ए-शोला-ए-ख़स[9] यक-नफ़स[10] है
हवस को पास-ए-नामूस-ए-वफ़ा[11] क्या
नफ़स मौज-ए-मुहीत-ए-बेखुदी[12] है
तग़ाफ़ुल-हाए-साक़ी[13] का गिला क्या
दिमाग़-ए-इत्र-ए-पैराहन[14] नहीं है
ग़म-ए-आवारगी-हाए-सबा[15] क्या
दिल-ए-हर-क़तरा है साज़-ए-अनल-बहर[16]
हम उस के हैं हमारा पूछना क्या
मुहाबा[17] क्या है मैं ज़ामिन[18], इधर देख
शहीदान-ए-निगह[19] का ख़ूं बहा[20] क्या
सुन ऐ ग़ारतगर-ए-जिन्स-ए-वफ़ा[21] सुन
शिकस्त[22]-ए-क़ीमत-ए-दिल की सदा क्या
किया किस ने ज़िगरदारी[23] का दावा
शकेब-ए-ख़ातिर-ए-आशिक़[24] भला क्या
ये क़ातिल वादा-ए-सब्र-आज़मा क्यूं
ये काफ़िर फ़ित्ना-ए-ताक़तरुबा[25] क्या
बला-ए-जां है ग़ालिब उस की हर बात
इबारत[26] क्या, इशारत[27] क्या, अदा क्या