धमकी में मर गया

धमकी में मर गया जो न बाब-ए-नबर्द[1] था
इश्क़े-नबर्द-पेशा[2] तलबगारे-मर्द[3] था

था ज़िन्दगी में मर्ग[4] का खटका लगा हुआ
उड़ने से पेशतर[5] भी मेरा रंग ज़र्द था

तालीफ़[6]-ए-नुस्ख़ा-हाए-वफ़ा[7] कर रहा था मैं
मजमूअ़-ए-ख़याल[8] अभी फ़र्द-फ़र्द[9] था

दिल ता ज़िग़र[10], कि साहिल[11]-ए-दरिया-ए-खूं है अब
उस रहगुज़र में जलवा-ए-गुल आगे गर्द था

जाती है कोई कश्मकश अन्दोहे-इश्क़[12] की
दिल भी अगर गया, तो वही दिल का दर्द था

अहबाब[13] चारा-साज़ी-ए-वहशत[14] न कर सके
ज़िन्दां[15] में भी ख़याल बयाबां-नवर्द[16] था

यह लाश बेकफ़न 'असदे-ख़स्ता-जां'[17] की है
हक़ मग़फ़रत करे[18] अ़जब आज़ाद मर्द था

शब्दार्थ:
  1. ↑ युद्ध का अभ्यासी
  2. ↑ प्यार, जो युद्ध में अभ्यसत है
  3. ↑ योद्धा की तलाश में
  4. ↑ मौत
  5. ↑ पहले ही
  6. ↑ सम्पादन
  7. ↑ वफ़ा की किताब
  8. ↑ विचार-समूह
  9. ↑ बिखरा हुआ
  10. ↑ दिल से ज़िग़र तक
  11. ↑ किनारा
  12. ↑ प्रेम की वेदना
  13. ↑ मित्र
  14. ↑ उन्माद का उपचार
  15. ↑ कैद
  16. ↑ जंगल में घूमना
  17. ↑ टूटे दिल वाले असद
  18. ↑ खुदा दया करे