नक़्श फ़रियादी है किसकी शोख़ी-ए-तहरीर का

नक़्श[1] फ़रियादी है किसकी शोख़ी-ए-तहरीर[2] का
काग़ज़ी है पैरहन हर पैकर[3]-ए-तस्वीर का

काव-काव[4]-ए सख़्तजानी[5] हाय तनहाई न पूछ
सुबह करना शाम का लाना है जू-ए-शीर[6] का

जज़्बा[7]-ए-बेअख़्तियारे-शौक़ देखा चाहिए
सीना-ए-शमशीर[8] से बाहर है दम[9] शमशीर का

आगही[10] दामे-शुनीदन[11] जिस क़दर चाहे बिछाए
मुद्दआ़ अ़न्क़ा[12] है अपने आ़लमे-तक़रीर[13] का

बस कि हूँ "ग़ालिब" असीरी[14] में भी आतिश-ज़ेर-पा[15]
मूए-आतिश-दीद़ा[16] है हल्क़ा[17] मेरी ज़ंजीर का

शब्दार्थ:
  1. ↑ चित्र
  2. ↑ शरारत भरी लिखावट
  3. ↑ व्यक्ति (यहाँ इसका मतलब)
  4. ↑ खोदना
  5. ↑ कठिन ज़िंदगी
  6. ↑ दूध की नदी
  7. ↑ तीव्र उमंग
  8. ↑ तलवार की मयान
  9. ↑ सिरा
  10. ↑ समझ
  11. ↑ प्रसिद्दी का जाल
  12. ↑ दुर्लभ
  13. ↑ बातचीत की दुनिया
  14. ↑ कैद
  15. ↑ पांव के नाचे की आग
  16. ↑ जला हुआ बाल
  17. ↑ कड़ी