कुछ पन्ने जिन्दगी के...
by कुछ पन्नें ज़िन्दगी के...
।। कविता संग्रह ।। जिन्दगी एक अभिलाषा है, गजब इसकी परिभाषा है। जिन्दगी क्या है? मत पूछो यारों, बन गई तो जन्नत बिखर गई तो तमाशा है।
Chapters
- देखा है तुझे बदलते हुए...
- बनाऐ रख आत्मबल....
- बीता हुआ कल...
- इक आशियाना मेरा....
- चोट खाये हुए हैऐं....
- औरों की खातिर....
- न गुमान कर...
- ढूँढ़ता रहा हूँ मैं....
- माँ आया तेरे द्वार....
- सच पूछो तो...
- मन बावड़ा....
- मैया ओ बाला मैया...
- जय माँ बाला त्रिपुर....
- !! हमारा देश !!
- !!माँ के दरबार!!
- सुनू मोर विनती....
- देखा है तुझे बदलते हुए...
- सच पूछो तो...
- मौत के आगोश में....