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देवी कवच - कर्मसमर्पणम्

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्र्वरि ॥
मन्त्रहीनं क्रियाहिनं भक्तिहीनं सुरेश्र्वरि ।
यत्कृतं तु मया कर्मं परिपूर्णं तदस्तु मे ॥
//इति प्रार्थना //
अनेन कृतकर्माणा भगवति श्रीमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वतीस्वरुपिणी श्रीजगद्म्बा प्रीयताम् ।
तत्सद्‌ब्र्ह्मार्पणमस्तु ॥ (असे म्हणून ताम्हण्यात एक पळी पाणी सोडावे व प्रथम सांगितल्याप्रमाणे आचमन करावे.)

देवी कवचे

संकलित
Chapters
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