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अष्टाध्यायी और योगसूत्र

पाणिनि द्वारा रचित यह दुनिया की प्रथम भाषा का प्रथम व्याकरण ग्रंथ अष्टाध्यायी (500 ई पू) है। इसमें आठ अध्याय हैं इसीलिए इसे अष्टाध्यायी कहा गया है। इस ग्रंथ का दुनिया की हर भाषा पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। अष्टाध्यायी में कुल सूत्रों की संख्या 3996 है। इन सभी सूत्रों को समझने के बाद आप को जिस ज्ञान की प्राप्त होगी वह दुनिया की अन्य किसी व्याकरण की किताब में नहीं मिलेगा। यह शुद्ध ज्ञान है।

पाणिनि के इस ग्रंथ पर महामुनि कात्यायन का विस्तृत वार्तिक ग्रन्थ है। इसी तरह पतंजलि ने इस ग्रंथ पर विशद विवरणात्मक ग्रन्थ महाभाष्य लिखा है। पतं‍जलि का योगसूत्र (150 ईसापूर्व) में पढ़ने लायक ग्रंथ है जिसमें योगासन की मान मात्र की चर्चा है। संपूर्ण ग्रंथ योग के रहस्य को उजागर करता है। योग सूत्र में ही अष्टांग योग की चर्चा की गई है।

यह अष्टांग योग दुनिया के सभी धर्मों के ग्रंथों और दुनिया के सभी तरह के दर्शन का निचोड़ या कहें की सार होने के साथ-साथ संपूर्ण धार्मिक और धार्मिक नियम ज्ञान का श्रेणिकरण और स्टेप-बाइ-स्टेप मोक्ष तक पहुंचने का सरल मार्ग है। मात्र इन दो ग्रंथों को पढ़ने और इन्हें विस्तृत रूप से समझने के बाद आपके दिमाग की दशा पहले जैसी नहीं रहेगी।