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यतिनाथ


अर्बुदाचल पर्वत के समीप शिवभक्त आहुक-आहुका एक भील दंपत्ति रहते थे | शिव ने उनकी परीक्षा लेने की सोची | वह यतिनाथ रूप लेकर उनके पास अथीथ्य ग्रहण करने पहुंचे | आहुका ने आपने पति को अतिथि की सेवा करने को कहा | जब रात को सोने की बात आई तो आहुक ने अपनी पत्नी और यतिनाथ को घर के भीतर सोने का आग्रह किया और खुद उनकी सुरक्षा के लिए बाहर चला गया | जब सुबह दोनों उठे तो उन्होनें देखा की आहुक को जंगली जानवरों ने खा लिया है |इस पर यतिनाथ दुखी होने लगे लेकिन आहुका ने कहा की आप दुखी नहीं हो ये हमारी नियति है और एस कह पति की चिताग्नि में जलने को तैयार होने लगी तब शिव आपने असली रूप में आ गए और आहुका को आपने पति से अगले जन्म में मिलने का वरदान दिया |