Android app on Google Play iPhone app Download from Windows Store

 

देवी माहात्म्यम्


श्री॥श्रीचण्डिकाध्यानम् ॐ बन्धूककुसुमाभासां पञ्चमुण्डाधिवासिनीम् । स्फुरच्चन्द्रकलारत्नमुकुटां मुण्डमालिनीम् ॥
त्रिनेत्रां रक्तवसनां पीनोन्नतघटस्तनीम् । पुस्तकं चाक्षमालां च वरं चाभयकं क्रमात् ॥
दधतीं संस्मरेन्नित्यमुत्तराम्नायमानिताम् ।
अथवा या चण्डी मधुकैटभादिदैत्यदलनी या माहिषोन्मूलिनी या धूम्रेक्षणचण्डमुण्डमथनी या रक्तबीजाशनी ।
शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलनी या सिद्धिदात्री परा सा देवी नवकोटिमूर्तिसहिता मां पातु विश्वेश्वरी ॥
अथ अर्गलास्तोत्रम् ॐ नमश्वण्डिकायै मार्कण्डेय उवाच --- ॐ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि ।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते ॥१॥
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥२॥
मधुकैटभविध्वंसि विधातृवरदे नमः । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥३॥
महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे नमः । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥४॥
धूम्रनेत्रवधे देवि धर्मकामार्थदायिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥५॥
रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥६॥
निशुम्भशुम्भनिर्नाशि त्रिलोक्यशुभदे नमः । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥७॥
वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥८॥
अचिन्त्यरूपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥९॥
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चापर्णे दुरितापहे । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१०॥
स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥११॥
चण्डिके सततं युद्धे जयन्ति पापनाशिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१२॥
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवि परं सुखम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१३॥
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि विपुलां श्रियम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१४॥
विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१५॥
सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१६॥
विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१७॥
देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पनिषूदिनि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१८॥
प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥१९॥
चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंसुते परमेश्वरि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२०॥
कृष्णेन संस्तुते देवि शश्वद्भक्त्या सदाम्बिके । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२१॥
हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्वरि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२२॥
इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्वरि । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२३॥
देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२४॥
भार्यां मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२५॥
तारिणि दुर्गसंसारसागरस्याचलोद्भवे । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥२६॥
इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः । सप्तशतीं समाराध्य वरमाप्नोति दुर्लभम् ॥२७॥
॥इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे अर्गलास्तोत्रं समाप्तम् ॥

देवी स्तोत्रे

स्तोत्रे
Chapters
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम्
ललितापञ्चरत्नम्
आनन्दसागरस्तवः
भगवतीस्तोत्रम्
विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्
श्रीचन्द्रमौलीश्वर
स्तुतिशतकम्
श्रीशारदास्वर्णरथसमर्पणापद्यावलिः
ललितापञ्चरत्नम्
शारदाभुजङ्गप्रयाताष्टकम्‌
श्रीशारदापञ्चरत्नस्तुतिः
श्री देवी स्तोत्रे
देवकृतलक्ष्मीस्तोत्रम्
त्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम्
लक्ष्मीलहरि:
इन्द्राक्षीस्तोत्रम्
भवानीभुजंगस्तोत्रम्
श्रेयस्करीस्तोत्रम्
देवीषट्‌कम्
दुर्गापदुद्धारस्तोत्रम्
नीलसरस्वतीस्तोत्रम्
सरस्वती स्तोत्र
श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्र
देवी स्तोत्र
देवी स्तोत्र
देवी स्तोत्र
देवी प्रणव श्लोकी
दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं
श्रीदुर्गासप्तश्लोकी
देवी माहात्म्यम्
कीलकस्तोत्रम्
देवी कवचम्
देवी स्तोत्र
नवरत्नमालिका
देवी पञ्चरत्नम्
धनलक्ष्मी स्तोत्रम्
अथ देवीसूक्तं
धनलक्ष्मी स्तोत्रम्
धर्माम्बिकास्तवः
नवदुर्गास्तोत्र
नवाक्षरीस्तोत्रम्
पार्वतीस्तोत्रम्
ब्रह्मस्तोत्रम्
बृहदम्बार्याशतकम्
भगवतीस्तोत्रम्
देवी स्तोत्र
हिमवानुवाच
देवी स्तोत्र
मीनाक्षी पञ्चरत्नम्
मीनाक्षीस्तोत्रम्
योगविषयः
योगिनीहृदयम्
श्रीराजराजेश्वर्यष्टकम्
राजराजेश्वरीस्तवः
रेणुकास्तोत्रम्
देवकृत लक्ष्मी स्तोत्रम्
देवी स्तोत्र
शक्तिसूत्राणि
शान्तिस्तवः
अघनाशकगायत्रीस्तोत्र
अम्बास्तोत्रम्
अर्धनारीश्वराष्टकम्
अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्
धनलक्ष्मी स्तोत्र
आर्यापञ्चदशीस्तोत्रम्
उमामहेश्वरस्तोत्रम्
कनक धारा स्तोत्र
कल्याणवृष्टिस्तवः
श्री कामाक्षी सुप्रभातम्
कीलकस्तोत्रम्
गंगास्तोत्र
श्री चण्डीपाठ
देवी स्तोत्र
देवी अथर्वशीर्ष