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जहाज पर नियंत्रण


विमान को कब्जे में लेने के बाद जल्द ही अपहर्ता ज़ायद सफारिनी को अहसास हो गया कि चालक दल भाग चुका है अतः उसे अधिकारियों से वार्ता करने पर मजबूर होना पड़ा। प्रथम व वयवसायिक श्रेणी के यात्रियों को विमान के पीछे की ओर जाने का आदेश दिया गया तथा पीछे के यात्रियों को आगे आने को कहा गया। क्योंकि विमान पूरा भरा था इसलिए यात्रियों को आइल ,गैली और निकासी द्वार के पास बेठना पड़ा |. सुबह के लगभग १० बजे सफारिनी ने विमान के अंदर एक चक्कर लगाया और २९ वर्षीय भारतीय अमेरिकी राजेश कुमार की सीट के आगे रुका। राजेश कैलिफॉर्निया का निवासी था तथा हाल ही में उसे अमेरिकी नागरिकता मिली थी। सफारिनी ने राजेश को आगे आने के लिए कहा और विमान के द्वार पर हाथ सिर के पीछे की ओर रखकर घुटनों के बल बैठने पर मजबूर कर दिया। अधिकारियों, विशेषतः विराफ दरोगा (पैन एम के पाकिस्तान ऑपरेशन्स के अध्यक्ष) से बातचीत करते हुए उसने कहा कि यदि चालक दल को १५ मिनट में विमान में नहीं भेजा गया तो वह राजेश को गोली से उड़ा देगा। थोड़ी ही देर बाद वह अधिकारियों से परेशान हो उठा और सभी के सामने उसने राजेश को सिर में गोली मार दी और उसे दरवाज़े के बाहर ज़मीन पर फेंक दिया। पाकिस्तानी अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार राजेश की साँस अभी चल रही थी, किन्तु अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में एम्बुलेंस में ही उसकी मृत्यु हो गई।

सफारिनी तब वापिस अपने बाकी साथियों के पास आ गया तथा उसने फ्लाइट अटेंडेंट्स को सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा करने के निर्देश दिए। अटेंडेंट्स ने अपनी जान के डर से इस आदेश का पालन किया। लेकिन  नीरजा  को अंदेशा था कि अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को खासतौर पर निशाना बनाया जा सकता है, अतः उसने कुछ अमेरिकन पासपोर्ट्स को एक सीट के नीचे छुपा दिया तथा कुछ को कूड़ेदान में।

पासपोर्ट इकट्ठे करने के बाद एक क्रू सदस्य ने इण्टरकॉम पर एक ब्रिटिश नागरिक माइकल थेक्सटॉन को विमान के अगले हिस्से में आने को कहा। वह परदे से होते हुए विमान के अगले हिस्से में पहुंचा जहाँ उसका सामना सफरिनि से हुआ जिसके हाथ में उसका पासपोर्ट था। उसने थेक्सटॉन से पूछा कि कहीं वह सिपाही तो नहीं और कहीं उसके पास बंदूक तो नहीं। थेक्सटॉन ने नहीं में जवाब दिया। तब उसने थेक्सटॉन को घुटनों के बल बैठने को कहा और अधिकारियों से बोला कि अगर कोई विमान के नज़दीक आया तो वह एक और यात्री को मर डालेगा। विराफ दरोगा ने उसे बताया कि विमान में एक क्रू सदस्य है जो कॉकपिट का रेडियो का प्रयोग कर सकता है और उसके माध्यम से आगे बातचीत की जा सकती है। सफरिनि थेक्सटॉन के पास वापिस गया और पूछा कि क्या उसे पानी चाहिए। थेक्सटॉन ने कहा - हाँ। सफरिनि ने यह भी पूछा कि क्या वह विवाहित है और दावा किया कि उसे हिंसा और ये सब मार काट बिलकुल पसंद नहीं है लेकिन अमेरिका और इजराइल ने उनके देश पर कब्ज़ा कर लिया है और वे ढंग की ज़िन्दगी नहीं जी पा रहे।

फिर एक हाईजैकर ने थेक्सटॉन को वापिस जाने को कहा। हाइजैक का प्रकरण रात तक चलता रहा। इस दौरान एक फ्लाइट अटेंडेंट ने मैन्युअल में से चुपचाप वह पन्ना निकाल लिया जिसमें कि  3 आर एयरक्राफ्ट द्वार की समस्त प्रणालियों का विवरण था और इसे एक मैगज़ीन में छुपा कर द्वार के पास बैठे यात्री को दे दिया। उसने उसे कहा कि वह अभी मैगज़ीन को अवश्य पढ़ ले और बाद में यदि आवश्यकता पड़ी तो प्रयोग कर ले। इस पृष्ठ पर अन्य जानकारियों के साथ निकासद्वार को खोलने और स्लाइड एप्रन को स्थापित करने की विधि भी वर्णित थी। रात लगभग 9 बजे सहायक विद्युत यूनिट बंद हो गयी, सभी बत्तियां बुझ गयी तथा इमरजेंसी लाइट जल गयी। आगे बैठे यात्रियों को पीछे आने और पीछे वाले यात्रियों को आगे आने का आदेश दिया | क्यूंकि आइल पहले ही से भरे हुए थे वह यात्री वहीँ बैठ गए | 

क्यूंकि अब विमान में रौशनी नहीं थी 1 एल द्वार के पास खड़े एक अपहरणकर्ता ने प्रार्थना कर 1 आर द्वार के पास खड़े अपहरणकर्ता की विस्फोटक बेल्ट पर गोली चलाने का फैसला किया | उसका मकसद था की इतना बड़ा विस्फोट हो जिसमें सारे यात्री और क्रू सदस्य और वह खुद भी मारे जांए | क्यूंकि अँधेरा था उसका निशाना चूक गया और एक छोटा सा विस्फोट हुआ | तभी अपहरणकर्ता यात्रियों पर ग्रेनेड फैंकने लगे | फिर रौशनी की कमी की वजह से ग्रेनेड की पिन नहीं खुली और छोटे विस्फोट ही हुए |अंत में उनकी गोलियों से ही सबसे ज्यादा नुकसान हुआ क्यूंकि हर गोली विमान से टकरा कर टुकड़े हो जाती थी | नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हुईं और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता मुहैय्या कराया।3 आर दरवाज़े के पास बैठे यात्री ने विमान प्रचारक द्वारा दिया गया निकासी परचा पढ़ लिया था और वह उस दरवाज़े को खोलने में सफल हो गया | नीरजा  चाहतीं तो दरवाजा खोलते ही खुद पहले कूदकर निकल सकती थीं किन्तु उन्होंने ऐसा न करके पहले यात्रियों को निकालने  का प्रयास किया। इसी प्रयास में तीन बच्चों को निकालते हुए जब एक आतंकवादी ने बच्चों पर गोली चलानी चाही  तो  नीरजा के  बीच में आकार मुकाबला करते वक्त उस आतंकवादी की गोलियों की बौछार से नीरजा की मृत्यु हुई। नीरजा के इस वीरतापूर्ण आत्मोत्सर्ग ने उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हीरोइन ऑफ हाईजैक के रूप में मशहूरियत दिलाई। अपहर्ताओं को एयरपोर्ट से निकलने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।