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बालकाण्ड दोहा ४१ से ५०

दोहा

समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग ।

कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग ॥४१॥

चौपाला

कीरति सरित छहूँ रितु रूरी । समय सुहावनि पावनि भूरी ॥

हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू । सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू ॥

बरनब राम बिबाह समाजू । सो मुद मंगलमय रितुराजू ॥

ग्रीषम दुसह राम बनगवनू । पंथकथा खर आतप पवनू ॥

बरषा घोर निसाचर रारी । सुरकुल सालि सुमंगलकारी ॥

राम राज सुख बिनय बड़ाई । बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई ॥

सती सिरोमनि सिय गुनगाथा । सोइ गुन अमल अनूपम पाथा ॥

भरत सुभाउ सुसीतलताई । सदा एकरस बरनि न जाई ॥

दोहा

अवलोकनि बोलनि मिलनि प्रीति परसपर हास ।

भायप भलि चहु बंधु की जल माधुरी सुबास ॥४२॥

चौपाला

आरति बिनय दीनता मोरी । लघुता ललित सुबारि न थोरी ॥

अदभुत सलिल सुनत गुनकारी । आस पिआस मनोमल हारी ॥

राम सुप्रेमहि पोषत पानी । हरत सकल कलि कलुष गलानौ ॥

भव श्रम सोषक तोषक तोषा । समन दुरित दुख दारिद दोषा ॥

काम कोह मद मोह नसावन । बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन ॥

सादर मज्जन पान किए तें । मिटहिं पाप परिताप हिए तें ॥

जिन्ह एहि बारि न मानस धोए । ते कायर कलिकाल बिगोए ॥

तृषित निरखि रबि कर भव बारी । फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी ॥

दोहा

मति अनुहारि सुबारि गुन गनि मन अन्हवाइ ।

सुमिरि भवानी संकरहि कह कबि कथा सुहाइ ॥४३ (क )॥

अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद ।

कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर मिलन सुभग संबाद ॥४३ (ख )॥

चौपाला

भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा । तिन्हहि राम पद अति अनुरागा ॥

तापस सम दम दया निधाना । परमारथ पथ परम सुजाना ॥

माघ मकरगत रबि जब होई । तीरथपतिहिं आव सब कोई ॥

देव दनुज किंनर नर श्रेनी । सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं ॥

पूजहि माधव पद जलजाता । परसि अखय बटु हरषहिं गाता ॥

भरद्वाज आश्रम अति पावन । परम रम्य मुनिबर मन भावन ॥

तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा । जाहिं जे मज्जन तीरथराजा ॥

मज्जहिं प्रात समेत उछाहा । कहहिं परसपर हरि गुन गाहा ॥

दोहा

ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग ।

कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग ॥४४॥

चौपाला

एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं । पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं ॥

प्रति संबत अति होइ अनंदा । मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा ॥

एक बार भरि मकर नहाए । सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए ॥

जगबालिक मुनि परम बिबेकी । भरव्दाज राखे पद टेकी ॥

सादर चरन सरोज पखारे । अति पुनीत आसन बैठारे ॥

करि पूजा मुनि सुजस बखानी । बोले अति पुनीत मृदु बानी ॥

नाथ एक संसउ बड़ मोरें । करगत बेदतत्व सबु तोरें ॥

कहत सो मोहि लागत भय लाजा । जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा ॥

दोहा

संत कहहि असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गाव ।

होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव ॥४५॥

चौपाला

अस बिचारि प्रगटउँ निज मोहू । हरहु नाथ करि जन पर छोहू ॥

रास नाम कर अमित प्रभावा । संत पुरान उपनिषद गावा ॥

संतत जपत संभु अबिनासी । सिव भगवान ग्यान गुन रासी ॥

आकर चारि जीव जग अहहीं । कासीं मरत परम पद लहहीं ॥

सोपि राम महिमा मुनिराया । सिव उपदेसु करत करि दाया ॥

रामु कवन प्रभु पूछउँ तोही । कहिअ बुझाइ कृपानिधि मोही ॥

एक राम अवधेस कुमारा । तिन्ह कर चरित बिदित संसारा ॥

नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा । भयहु रोषु रन रावनु मारा ॥

दोहा

प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि ।

सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि ॥४६॥

चौपाला

जैसे मिटै मोर भ्रम भारी । कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी ॥

जागबलिक बोले मुसुकाई । तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई ॥

राममगत तुम्ह मन क्रम बानी । चतुराई तुम्हारी मैं जानी ॥

चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा । कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा ॥

तात सुनहु सादर मनु लाई । कहउँ राम कै कथा सुहाई ॥

महामोहु महिषेसु बिसाला । रामकथा कालिका कराला ॥

रामकथा ससि किरन समाना । संत चकोर करहिं जेहि पाना ॥

ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी । महादेव तब कहा बखानी ॥

दोहा

कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद ।

भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद ॥४७॥

चौपाला

एक बार त्रेता जुग माहीं । संभु गए कुंभज रिषि पाहीं ॥

संग सती जगजननि भवानी । पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी ॥

रामकथा मुनीबर्ज बखानी । सुनी महेस परम सुखु मानी ॥

रिषि पूछी हरिभगति सुहाई । कही संभु अधिकारी पाई ॥

कहत सुनत रघुपति गुन गाथा । कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा ॥

मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी । चले भवन सँग दच्छकुमारी ॥

तेहि अवसर भंजन महिभारा । हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा ॥

पिता बचन तजि राजु उदासी । दंडक बन बिचरत अबिनासी ॥

दोहा

ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ ।

गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ ॥४८ (क )॥

सो

संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ ॥

तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची ॥४८ (ख )॥

चौपाला

रावन मरन मनुज कर जाचा । प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा ॥

जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा । करत बिचारु न बनत बनावा ॥

एहि बिधि भए सोचबस ईसा । तेहि समय जाइ दससीसा ॥

लीन्ह नीच मारीचहि संगा । भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा ॥

करि छलु मूढ़ हरी बैदेही । प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही ॥

मृग बधि बन्धु सहित हरि आए । आश्रमु देखि नयन जल छाए ॥

बिरह बिकल नर इव रघुराई । खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई ॥

कबहूँ जोग बियोग न जाकें । देखा प्रगट बिरह दुख ताकें ॥

दोहा

अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान ।

जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन ॥४९॥

चौपाला

संभु समय तेहि रामहि देखा । उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा ॥

भरि लोचन छबिसिंधु निहारी । कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी ॥

जय सच्चिदानंद जग पावन । अस कहि चलेउ मनोज नसावन ॥

चले जात सिव सती समेता । पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता ॥

सतीं सो दसा संभु कै देखी । उर उपजा संदेहु बिसेषी ॥

संकरु जगतबंद्य जगदीसा । सुर नर मुनि सब नावत सीसा ॥

तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा । कहि सच्चिदानंद परधमा ॥

भए मगन छबि तासु बिलोकी । अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी ॥

दोहा

ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद ।

सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत वेद ॥५०॥

चौपाला

बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी । सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी ॥
खोजइ सो कि अग्य इव नारी । ग्यानधाम श्रीपति असुरारी ॥
संभुगिरा पुनि मृषा न होई । सिव सर्बग्य जान सबु कोई ॥
अस संसय मन भयउ अपारा । होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा ॥
जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी । हर अंतरजामी सब जानी ॥
सुनहि सती तव नारि सुभाऊ । संसय अस न धरिअ उर काऊ ॥
जासु कथा कुभंज रिषि गाई । भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई ॥
सोउ मम इष्टदेव रघुबीरा । सेवत जाहि सदा मुनि धीरा ॥

छंद

मुनि धीर जोगी सिद्ध संतत बिमल मन जेहि ध्यावहीं।
कहि नेति निगम पुरान आगम जासु कीरति गावहीं ॥
सोइ रामु ब्यापक ब्रह्म भुवन निकाय पति माया धनी।
अवतरेउ अपने भगत हित निजतंत्र नित रघुकुलमनि ॥

रामचरितमानस

गोस्वामी तुलसीदास
Chapters
बालकाण्ड श्लोक
बालकाण्ड दोहा १ से १०
बालकाण्ड दोहा ११ से २०
बालकाण्ड दोहा २१ से ३०
बालकाण्ड दोहा ३१ से ४०
बालकाण्ड दोहा ४१ से ५०
बालकाण्ड दोहा ५१ से ६०
बालकाण्ड दोहा ६१ से ७०
बालकाण्ड दोहा ७१ से ८०
बालकाण्ड दोहा ८१ से ९०
बालकाण्ड दोहा ९१ से १००
बालकाण्ड दोहा १०१ से ११०
बालकाण्ड दोहा १११ से १२०
बालकाण्ड दोहा १२१ से १३०
बालकाण्ड दोहा १३१ से १४०
बालकाण्ड दोहा १४१ से १५०
बालकाण्ड दोहा १५१ से १६०
बालकाण्ड दोहा १६१ से १७०
बालकाण्ड दोहा १७१ से १८०
बालकाण्ड दोहा १८१ से १९०
बालकाण्ड दोहा १९१ से २००
बालकाण्ड दोहा २०१ से २१०
बालकाण्ड दोहा २११ से २२०
बालकाण्ड दोहा २२१ से २३०
बालकाण्ड दोहा २३१ से २४०
बालकाण्ड दोहा २४१ से २५०
बालकाण्ड दोहा २५१ से २६०
बालकाण्ड दोहा २६१ से २७०
बालकाण्ड दोहा २७१ से २८०
बालकाण्ड दोहा २८१ से २९०
बालकाण्ड दोहा २९१ से ३००
बालकाण्ड दोहा ३०१ से ३१०
बालकाण्ड दोहा ३११ से ३२०
बालकाण्ड दोहा ३२१ से ३३०
बालकाण्ड दोहा ३३१ से ३४०
बालकाण्ड दोहा ३४१ से ३५०
बालकाण्ड दोहा ३५१ से ३६०
अयोध्या काण्ड श्लोक
अयोध्या काण्ड दोहा १ से १०
अयोध्या काण्ड दोहा ११ से २०
अयोध्या काण्ड दोहा २१ से ३०
अयोध्या काण्ड दोहा ३१ से ४०
अयोध्या काण्ड दोहा ४१ से ५०
अयोध्या काण्ड दोहा ५१ से ६०
अयोध्या काण्ड दोहा ६१ से ७०
अयोध्या काण्ड दोहा ७१ से ८०
अयोध्या काण्ड दोहा ८१ से ९०
अयोध्या काण्ड दोहा ९१ से १००
अयोध्या काण्ड दोहा १०१ से ११०
अयोध्या काण्ड दोहा १११ से १२०
अयोध्या काण्ड दोहा १२१ से १३०
अयोध्या काण्ड दोहा १३१ से १४०
अयोध्या काण्ड दोहा १४१ से १५०
अयोध्या काण्ड दोहा १५१ से १६०
अयोध्या काण्ड दोहा १६१ से १७०
अयोध्या काण्ड दोहा १७१ से १८०
अयोध्या काण्ड दोहा १८१ से १९०
अयोध्या काण्ड दोहा १९१ से २००
अयोध्या काण्ड दोहा २०१ से २१०
अयोध्या काण्ड दोहा २११ से २२०
अयोध्या काण्ड दोहा २२१ से २३०
अयोध्या काण्ड दोहा २३१ से २४०
अयोध्या काण्ड दोहा २४१ से २५०
अयोध्या काण्ड दोहा २५१ से २६०
अयोध्या काण्ड दोहा २६१ से २७०
अयोध्या काण्ड दोहा २७१ से २८०
अयोध्या काण्ड दोहा २८१ से २९०
अयोध्या काण्ड दोहा २९१ से ३००
अयोध्या काण्ड दोहा ३०१ से ३१०
अयोध्या काण्ड दोहा ३११ से ३२६
अरण्यकाण्ड श्लोक
अरण्यकाण्ड दोहा १ से १०
अरण्यकाण्ड दोहा ११ से २०
अरण्यकाण्ड दोहा २१ से ३०
अरण्यकाण्ड दोहा ३१ से ४०
अरण्यकाण्ड दोहा ४१ से ४६
किष्किन्धाकाण्ड श्लोक
किष्किन्धाकाण्ड दोहा १ से १०
किष्किन्धाकाण्ड दोहा ११ से २०
किष्किन्धाकाण्ड दोहा २१ से ३०
सुन्दरकाण्ड श्लोक
सुन्दरकाण्ड दोहा १ से १०
सुन्दरकाण्ड दोहा ११ से २०
सुन्दरकाण्ड दोहा २१ से ३०
सुन्दरकाण्ड दोहा ३१ से ४०
सुन्दरकाण्ड दोहा ४१ से ५०
सुन्दरकाण्ड दोहा ५१ से ६०
लंकाकाण्ड श्लोक
लंकाकाण्ड दोहा १ से १०
लंकाकाण्ड दोहा ११ से २०
लंकाकाण्ड दोहा २१ से ३०
लंकाकाण्ड दोहा ३१ से ४०
लंकाकाण्ड दोहा ४१ से ५०
लंकाकाण्ड दोहा ५१ से ६०
लंकाकाण्ड दोहा ६१ से ७०
लंकाकाण्ड दोहा ७१ से ८०
लंकाकाण्ड दोहा ८१ से ९०
लंकाकाण्ड दोहा ९१ से १००
लंकाकाण्ड दोहा १०१ से ११०
लंकाकाण्ड दोहा १११ से १२१
उत्तरकाण्ड - श्लोक
उत्तरकाण्ड - दोहा १ से १०
उत्तरकाण्ड - दोहा ११ से २०
उत्तरकाण्ड - दोहा २१ से ३०
उत्तरकाण्ड - दोहा ३१ से ४०
उत्तरकाण्ड - दोहा ४१ से ५०
उत्तरकाण्ड - दोहा ५१ से ६०
उत्तरकाण्ड - दोहा ६१ से ७०
उत्तरकाण्ड - दोहा ७१ से ८०
उत्तरकाण्ड - दोहा ८१ से ९०
उत्तरकाण्ड - दोहा ९१ से १००
उत्तरकाण्ड - दोहा १०१ से ११०
उत्तरकाण्ड - दोहा १११ से १२०
उत्तरकाण्ड - दोहा १२१ से १३०