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विपदाओं से रक्षा करो, यह न मेरी प्रार्थना - रबीन्द्रनाथ टैगोर

विपदाओं से रक्षा करो-
     यह न मेरी प्रार्थना,
      यह करो : विपद् में न हो भय।
दुख से व्यथित मन को मेरे
       भले न हो सांत्वना,
          यह करो : दुख पर मिले विजय।

मिल सके न यदि सहारा,
अपना बल न करे किनारा; -
क्षति ही क्षति मिले जगत् में
                 मिले केवल वंचना,
मन में जगत् में न लगे क्षय।

करो तुम्हीं त्राण मेरा-
   यह न मेरी प्रार्थना,
       तरण शक्ति रहे अनामय।
भार भले कम न करो,
भले न दो सांत्वना,
        यह करो : ढो सकूँ भार-वय।
        सिर नवाकर झेलूँगा सुख,
        पहचानूँगा तुम्हारा मुख,
मगर दुख-निशा में सारा
       जग करे जब वंचना,
यह करो : तुममें न हो संशय।

 

 

कथासरित्सागर

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